रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। शाश्वत हिंदू प्रतिष्ठान की एक विशेष बैठक रविवार, 15 मार्च 2026 को आदरणीय श्री आलोक स्वरूप की अध्यक्षता में उनके निवास पर आयोजित की गई। बैठक का शुभारंभ तीन बार ‘ॐ’ के उच्चारण के साथ आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। कार्यक्रम में धर्म, मंदिर और समाज के परस्पर संबंधों पर गंभीर मंथन करते हुए मंदिरों को केवल पूजा-अर्चना का केंद्र न मानकर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।
बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री संजय शर्मा ने डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से विस्तार से बताया कि धर्म का मूल आधार मंदिर है और शाश्वत हिंदू प्रतिष्ठान इसी सोच के साथ ‘शाश्वत हिंदू मंदिर इकोसिस्टम’ की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि मंदिरों को भक्ति के साथ-साथ सामाजिक सहयोग, सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक-सामुदायिक सहभागिता का केंद्र बनाया जाए, तो यही मार्ग भारत को सशक्त, संगठित और आत्मविश्वासी राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इस दौरान शाश्वत देवालय, शाश्वत प्रांगण, शाश्वत बाजार, शाश्वत कार्ड और आशीर्वाद कार्ड जैसी योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई। वक्ताओं ने बताया कि इन पहलों को राष्ट्रीय संत विजय कौशल महाराज, जैन संत लोकेश मुनि और आध्यात्मिक गुरु डॉ. पवन सिन्हा का भरपूर मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। बैठक में यह भी कहा गया कि मंदिरों के माध्यम से समाज को जोड़ना, सेवा और संस्कार की धारा को मजबूत करना तथा सनातन चेतना को संगठित करना समय की जरूरत है। इसमें सहयोग करना हर सनातनी का धर्म है।
बैठक में संगठन के केंद्रीय पदाधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति रही। इनमें राष्ट्रीय महामंत्री संजय शर्मा, शाश्वत प्रांगण के संयोजक रितेश बिजोरिया, शाश्वत बाजार के संयोजक विराज मजूमदार, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री रवि कटारिया, टेक्नोलॉजी प्रमुख राजीव बागची तथा प्रदेश महामंत्री ललित महेश्वरी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम के प्रभारी ललित महेश्वरी रहे, जबकि प्रभाव स्वरूप युवा संयोजक की भूमिका में सक्रिय रहे।
इसके अलावा समाज के कई प्रमुख गणमान्य नागरिक और उद्योगपति भी बैठक में शामिल हुए। इनमें डॉ. अनुभूषण, भीमसेन कंसल, सतीश टिहरी, डॉ. रामानी, राकेश बिंदल, राजीव जैन, दिनेश मोहन एडवोकेट, अनिल स्वरूप, कुश पुरी, अरुण खंडेलवाल, गंगा प्रताप, जगमोहन गोयल, अभिनव स्वरूप, डॉ. अरुणा गर्ग, मंजू महेश्वरी, माधवी स्वरूप, तूलिका स्वरूप, प्रीति गुप्ता, श्रवण अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, मोहित बंसल, मनोज अग्रवाल और नीतीश ऐरन सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
बैठक में मौजूद वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जब मंदिर समाज जीवन के केंद्र बनेंगे, तभी सांस्कृतिक आत्मविश्वास मजबूत होगा और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। शाश्वत हिंदू प्रतिष्ठान की यह पहल धार्मिक चेतना को सामाजिक शक्ति में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

