रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। करीब दो दशक से अदालत की चौखट पर चल रहे चर्चित बूथ कांड मामले में आखिरकार बड़ा फैसला सामने आ गया। वर्ष 2005 के जिला पंचायत चुनाव के दौरान थाना मंसूरपुर क्षेत्र के गांव सोंटा में बूथ लूट, सरकारी कर्मचारी पर जानलेवा हमले और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोपों में दर्ज मुकदमे में अदालत ने मौजूदा रालोद जिलाध्यक्ष संजय राठी समेत चार आरोपियों को गुण-दोष के आधार पर बरी कर दिया। करीब 21 साल तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करते हुए पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।

मामले के अनुसार वर्ष 2005 में जिला पंचायत चुनाव के दौरान गांव सोंटा स्थित बूथ पर विवाद और हंगामे की सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए छह लोगों—संजय राठी, जितेंद्र, कालूराम, ओमकार, देवेंद्र और यशपाल राठी—के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया था। आरोप था कि बूथ लूटने का प्रयास किया गया और ड्यूटी पर तैनात राज्य कर्मचारी पर जान से मारने की नीयत से हमला कर सरकारी कार्य में बाधा डाली गई।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्रणव कुमार ने बताया कि लंबी सुनवाई और साक्ष्यों की पड़ताल के बाद अदालत ने चार आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। उन्होंने कहा कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो अभियुक्तों की मृत्यु भी हो चुकी है।
करीब दो दशक पुराने इस मामले में आए फैसले को लेकर समर्थकों में संतोष का माहौल है, जबकि राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। अदालत के इस निर्णय ने एक लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद पर पूर्ण विराम लगा दिया है।

