ध्वस्त मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

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राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा

रिपोर्ट – अनिल कुमार

फतेहपुर। काशी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट को प्रदेश सरकार द्वारा ध्वस्त कराए जाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उसके पुनर्निर्माण की मांग को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि मणिकर्णिका घाट का सन 1791 में माता अहिल्याबाई होल्कर द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया था और सनातन धर्म में इस घाट का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थान है। कांग्रेस ने मांग की है कि काशी के धर्माचार्यों और काशीवासियों से विचार-विमर्श कर घाट का पुनर्निर्माण कराया जाए। ज्ञापन सौंपने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेश द्विवेदी ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास कार्यों से भटक कर केवल धार्मिक स्थलों को तोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट सनातन धर्म के अनुसार अत्यंत पवित्र स्थल है, लेकिन भाजपा सरकार किस सनातन धर्म को मानती है, यह समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से रोके जाने की घटना से सरकार की मंशा स्पष्ट हो जाती है कि वह धर्म की बजाय केवल सत्ता का पालन करती है। वहीं शहर कांग्रेस अध्यक्ष आरिफ गुड्डा ने भी धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं, जिनसे उन्हें अपने धर्म और संस्कृति के महत्व की जानकारी मिलती है। ऐसे स्थलों को नष्ट करना अक्षम्य अपराध है। उन्होंने सरकार से शीघ्र ध्वस्त घाट के पुनर्निर्माण की मांग की।
इस अवसर पर ज्ञापन सौंपने वालों में वरिष्ठ नेता सुधाकर अवस्थी, शेख एजाज अहमद, कलीम उल्ला सिद्दीकी, मणि प्रकाश दुबे, प्रवक्ता ई. देवी प्रकाश दुबे, पंडित राम नरेश महराज, अनुराग नारायण मिश्र, आदित्य श्रीवास्तव, मनोज घायल, सहाब अली, मुन्ना भाई, राजू लोधी, नवनीत तिवारी, ब्रजेश मिश्रा, बसीर अहमद, अमरनाथ कैथल, चौधरी मोइन राइन, अजय बच्चा, राजीव श्रीवास्तव, कासिम उल्ला, रिजवान, निजामुद्दीन सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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