रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में सहारा समूह की 212.51 एकड़ जमीन को लेकर बड़ा विवाद पैदा हो गया है। एक स्थानीय नागरिक ने आरोप लगाया है कि प्लॉट बिक्री, भुगतान और रजिस्ट्री में सुप्रीम कोर्ट और SEBI के आदेशों की सीधी अनदेखी की गई। जिले के डीएम से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। मिली जानकारी के अनुसार प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के 2013, 2014 और 2016 के आदेशों में यह स्पष्ट था कि सहारा समूह बिना शर्त पूरी किए कोई भी अचल संपत्ति ट्रांसफर नहीं कर सकता। इसके बावजूद 212.51 एकड़ जमीन की कथित बिक्री की गई, और भुगतान SEBI-Sahara Refund Account में जमा हुआ या नहीं—इसका कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। VO में यह भी दावा किया गया कि प्लॉट बुकिंग वर्ष 2024 में ही कर ली गई जबकि नक्शा अनुमोदन 2025 का बताया जा रहा है। इसके साथ-साथ बिना Completion Certificate के रजिस्ट्री कराने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है, जो RERA Act 2016 की धारा 3(1) का खुला उल्लंघन माना जाता है।
विकास बालियान ने यह भी कहा कि जब इन तथ्यों पर सवाल उठाए गए तो भूमि विक्रेता पक्ष ने प्रेस कांफ्रेंस में उन्हें “ब्लैकमेलर” तक कह दिया, जो जांच मांगने वालों को डराने का प्रयास प्रतीत होता है।
पत्र में विकास बालियान
ने जिलाधिकारी से निम्न प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल जांच की मांग की है—
- क्या जमीन बिक्री SEBI–सुप्रीम कोर्ट शर्तों के तहत हुई?
- क्या वसूला गया पैसा SEBI के रिफंड खाते में जमा हुआ?
- क्या 2024 में RERA अनुमति से पहले प्लॉट बेचे गए?
- क्या नक्शा पास होने से पहले करोड़ों का भुगतान वसूला गया?
इसके साथ ही उन्होंने SFIO + RERA + SEBI + तहसील व राजस्व विभाग की संयुक्त जांच समिति गठित करने की मांग की है। और जब तक जांच पूर्ण न हो—जमीन से संबंधित बिक्री/रजिस्ट्री प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाने का अनुरोध भी किया है।
दस्तावेजों में RTI जवाब, नक्शा स्वीकृति रिकॉर्ड, SC आदेश, SEBI पत्राचार, भुगतान रिपोर्ट, प्लॉट allotment विवरण सहित कई प्रमाण संलग्न किए गए हैं।
“मैंने सभी तथ्य दस्तावेजों के साथ दिए हैं। यह मामला निवेशकों के हित और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से जुड़ा है। जल्द जांच होनी चाहिए।”
