गलत नक्शा-23 पर किसानों का फूटा गुस्सा—कलेक्ट्रेट में तीसरे दिन भी जारी अनिश्चितकालीन धरना, संगठन के पदाधिकारी बोले– अब आर-पार की लड़ाई

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रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। चरथावल क्षेत्र के ग्राम दूधली के किसानों द्वारा चकबन्दी विभाग के खिलाफ शुरू किया गया आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा। गलत नक्शा-23 जारी करने, आपत्तियाँ न सुनने और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से नाराज़ किसान मंगलवार को तीसरे दिन भी कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना दिए बैठे रहे। किसान मजदूर संगठन (पंजी. 1302/18) के बैनर तले चल रहा यह धरना अब और तेज होता दिखाई दे रहा है।

धरना स्थल पर पहुंचे संगठन के राष्ट्रीय सचिव कृष्ण पाल ने कहा कि चकबन्दी विभाग किसानों के साथ धोखा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग ने जिन किसानों की जमीनें रकबे में कमी, कीमतों में असमानता और चक वितरण में गड़बड़ी के कारण प्रभावित हुई हैं, उनकी शिकायतें जानबूझकर लंबित रखी जा रही हैं। कृष्ण पाल ने चेतावनी दी कि “यदि प्रशासन ने तुरंत गलत नक्शा-23 को निरस्त कर सभी किसानों की आपत्तियों का समाधान नहीं किया, तो आंदोलन जिले भर में फैलाया जाएगा।”

वहीं, बबली राणा पुंडीर वंश के अध्यक्ष ने भी मंच से सरकार और प्रशासन पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसान पिछले कई महीनों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन विभाग आश्वासन देकर समय काट रहा है। बबली राणा ने कहा—“चकबन्दी विभाग किसानों की पीड़ा को समझने की बजाय हितग्राहियों की सूची बनाकर कार्य कर रहा है। किसानों के साथ खुली लूट और अन्याय हो रहा है, जिसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने एसीओ अजय कुमार आर्य पर भी गंभीर आरोप दोहराते हुए कहा कि किसानों द्वारा दी गई शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।

धरने पर मौजूद किसानों ने बताया कि 08 नवंबर को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया था, जिसके बाद एसओसी चकबन्दी ने दो दिन में समाधान का आश्वासन दिया था। 12 नवंबर को एसओसी, डीडीसी और सीओ चकबन्दी ने फिर दो दिन का समय मांगा, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। किसानों ने कहा कि विभाग बार-बार तारीख देकर उन्हें भ्रमित कर रहा है।

धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि वे न्याय की उम्मीद में कलेक्ट्रेट आए हैं और सही, निष्पक्ष और संशोधित नक्शा-23 जारी होने तक वापस नहीं जाएंगे। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी—यदि आज भी नक्शा-23 निरस्त नहीं होता, तो आंदोलन और बड़ा रूप लेगा और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।

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