जखनियां रेंज में वन विभाग के माली की काली करतूत उजागर अवैध आरा मशीनों को संरक्षण का आरोप रिपोर्ट -एकरार खान गाजीपुर। जिले में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और अवैध आरा मशीनों का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जखनियां रेंज से जुड़ी एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। यहां वन विभाग में तैनात कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वह हर महीने अवैध आरा मशीनों के संचालकों से 3 से 4 हजार रुपये तक की वसूली करता है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह पैसा केवल उसकी जेब तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि बाकायदा विभागीय स्तर पर बंटवारा होता है। आरोप है कि वसूली की रकम का हिस्सा सीधे रेंजर से लेकर डीएफओ तक पहुंचता है। इस मिलीभगत के चलते जखनियां रेंज में खुलेआम अवैध आरा मशीनें चल रही हैं और हरे-भरे पेड़ों की लगातार कटाई हो रही है। स्थानीय लोगों की शिकायतें ग्रामीणों का कहना है कि बीते कई महीनों से क्षेत्र में बिना किसी रोकटोक के लकड़ी की तस्करी हो रही है। आरा मशीनें दिन-रात चल रही हैं और लकड़ी को आसानी से बाहर भेजा जा रहा है। शिकायतें कई बार अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ता को ही डराने-धमकाने का काम किया गया। वन संपदा पर खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों से पर्यावरण को सीधा नुकसान हो रहा है। जहां एक तरफ सरकार वृक्षारोपण और हरित क्रांति के नारे दे रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग के कर्मचारी और अधिकारी मिलकर हरे-भरे पेड़ों की कटाई करवा रहे हैं। इससे न सिर्फ जंगलों का अस्तित्व खतरे में है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संकट गहराता जा रहा है उठते बड़े सवाल जब अवैध आरा मशीनें दिनदहाड़े चल रही हैं तो विभागीय अधिकारी आंखें क्यों मूंदे हुए हैं? हर महीने लाखों का खेल चल रहा है तो क्या इसकी जानकारी शासन-प्रशासन तक नहीं पहुंचती? क्या केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति होगी या इस पूरे भ्रष्ट नेटवर्क की सच्चाई सामने आएगी? ग्रामीणों की मांग ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों तक यह पैसा पहुंचता है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि जब तक बड़े अधिकारियों पर शिकंजा नहीं कसेगा, तब तक यह गोरखधंधा बंद नहीं होगा। कुल मिलाकर, जखनियां रेंज का यह मामला सिर्फ स्थानीय स्तर का नहीं बल्कि विभागीय भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण है। अब देखना यह है कि सरकार इस पर कब और क्या कदम उठाती है।अवैध आरा मशीनों को संरक्षण का आरोप
रिपोर्ट -एकरार खान


