Homeउत्तर प्रदेशओटीपी, फिशिंग लिंक और डिजिटल अरेस्ट से बचने का पढ़ाया पाठ

ओटीपी, फिशिंग लिंक और डिजिटल अरेस्ट से बचने का पढ़ाया पाठ

रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। साइबर जागरूकता माह के तहत साइबर थाना पुलिस ने भोकरहेड़ी इंटर कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें एनसीसी कैडेट्स को साइबर ठगी के नए-नए तरीकों से सावधान रहने और डिजिटल सुरक्षा के जरूरी उपायों की जानकारी दी गई।

साइबर थाना प्रभारी कर्मवीर सिंह ने कैडेट्स को ओटीपी फ्रॉड, फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल और मैसेज, APK फाइल, फर्जी वेबसाइट व ऐप, यूपीआई और क्यूआर कोड फ्रॉड, सोशल मीडिया ठगी तथा डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी कभी बैंक अधिकारी, कभी पुलिसकर्मी तो कभी किसी कंपनी का प्रतिनिधि बनकर लोगों को झांसे में लेते हैं और गोपनीय जानकारी हासिल कर खाते से रकम निकाल लेते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, सीवीवी, पासवर्ड या बैंक खाते से जुड़ी जानकारी साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने और मोबाइल पर आई संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल करने से भी बचें। ऐसी फाइलों के जरिये साइबर अपराधी मोबाइल में मौजूद महत्वपूर्ण जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

कार्यक्रम में सोशल मीडिया अकाउंट सुरक्षित रखने के लिए मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। कैडेट्स को समझाया गया कि किसी संदिग्ध कॉल, मैसेज, लिंक या ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें।

पुलिस ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाए तो तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को होल्ड या फ्रीज कराने की कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है।

मुजफ्फरनगर पुलिस की ओर से साइबर जागरूकता माह के तहत स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य युवाओं और आमजन को साइबर अपराध के बदलते तरीकों से अवगत कराते हुए सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करना है।

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