रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। यूजीसी के 2026 के समानता संबंधी नियमों को लेकर सवर्ण समाज का विरोध बुधवार को सड़क पर उतर आया। संयुक्त सवर्ण समाज के आह्वान पर टाउन हॉल से जिलाधिकारी कार्यालय तक बड़ी संख्या में लोगों ने पैदल मार्च निकाला। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने नियमों पर पुनर्विचार की मांग को लेकर नारेबाजी की। डीएम कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उच्च शिक्षा में समानता और समान अवसर जरूरी हैं, लेकिन नियम बनाते समय सभी वर्गों की आपत्तियों और चिंताओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि यूजीसी के 2026 के नियमों के कुछ प्रावधानों को लेकर समाज में असंतोष है। सरकार से नियमों की समीक्षा कर आवश्यक बदलाव करने की मांग की गई।
टाउन हॉल से डीएम कार्यालय तक गूंजे विरोध के स्वर
बुधवार को टाउन हॉल पर सवर्ण समाज के लोग जुटे। यहां से पैदल मार्च शुरू हुआ, जो मुख्य मार्गों से होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। प्रदर्शनकारियों के हाथों में विभिन्न मांगों से जुड़ी तख्तियां और बैनर थे। डीएम कार्यालय पर प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन का नेतृत्व अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि सरकार को सवर्ण समाज की आपत्तियों को गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के मुजफ्फरनगर आगमन के दौरान कुछ सवर्ण नेताओं को ज्ञापन देने से रोकने और उनके घरों के बाहर पुलिस तैनात कर करीब 18 घंटे तक नजरबंद रखने का आरोप भी लगाया।
प्रदर्शन के दौरान संजय मिश्रा, भाजपा नेता सुनील तायल, गीता ठाकुर समेत अन्य वक्ताओं ने भी विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों से संवाद होना चाहिए।
मांग पूरी नहीं हुई तो बढ़ेगा आंदोलन
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पैदल मार्च और ज्ञापन के जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचाई गई है। यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। मार्च में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे।
