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आईएमसीआर की प्रस्तावित बैठक में पसमांदा समाज के प्रतिनिधित्व की मांग, ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ ने पारित किया प्रस्ताव

रिपोर्टर: संदीप वर्मा

लोकेशन: बाराबंकी

बाराबंकी में ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के कैंप कार्यालय पर आयोजित बैठक में 24 जुलाई 2026 को इंडियन मुस्लिम फॉर सिविल राइट्स (IMCR) द्वारा नई दिल्ली में प्रस्तावित राष्ट्रीय बैठक को लेकर चर्चा की गई। बैठक के अंत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर आईएमसीआर से पसमांदा मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों को बैठक में सम्मानजनक भागीदारी देने की मांग की गई।

बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष हाजी नूरुल हसन अंसारी ने की। इस दौरान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन सहित कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

समावेशी प्रतिनिधित्व पर दिया जोर

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि संगठन प्रस्तावित बैठक के उद्देश्यों या उसमें उठाए जाने वाले मुद्दों का विरोध नहीं करता। उनका कहना था कि मुस्लिम समाज से जुड़े विभिन्न सामाजिक और धार्मिक विषयों पर संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से संवाद होना आवश्यक है।

हालांकि, वक्ताओं ने कहा कि यदि यह बैठक पूरे भारतीय मुस्लिम समाज का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है, तो पसमांदा समाज की भागीदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

वसीम राईन ने रखी बात

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय मंच की विश्वसनीयता तभी मजबूत होती है, जब उसमें समाज के सभी वर्गों को समान अवसर और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने कहा कि व्यापक और समावेशी संवाद से ही किसी भी पहल को व्यापक स्वीकार्यता मिल सकती है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों को भी बुलाने की मांग

बैठक में यह भी कहा गया कि यदि प्रस्तावित कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित किया जा रहा है, तो पसमांदा समाज से जुड़े सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न दलों के पसमांदा प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए।

आयोजकों से पुनर्विचार का आग्रह

बैठक में पारित प्रस्ताव में आईएमसीआर के आयोजकों से आग्रह किया गया कि वे बैठक की रूपरेखा पर पुनर्विचार करते हुए पसमांदा समाज के प्रमुख संगठनों और प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करें।

महाज़ ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि समाज के भीतर समावेशी, रचनात्मक और संवैधानिक संवाद को बढ़ावा देना है। संगठन ने कहा कि वह भविष्य में भी सामाजिक न्याय, समान भागीदारी और समावेशी प्रतिनिधित्व के पक्ष में अपनी आवाज़ उठाता रहेगा।

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