रिपोर्टर: जमील खान
टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश)। शहर में बढ़ी हुई जलकर दर और बिगड़ी पेयजल व्यवस्था को लेकर नागरिकों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में वर्तमान 260 रुपये प्रतिमाह जलकर की वसूली पर रोक लगाने तथा नगर पालिका परिषद द्वारा प्रस्तावित 150 रुपये प्रतिमाह की दर लागू करने की मांग की गई है।
160 प्रतिशत वृद्धि पर जताई आपत्ति
ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2021-22 तक शहर में जलकर 100 रुपये प्रतिमाह था, लेकिन वर्ष 2022-23 में इसे बढ़ाकर 260 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। नागरिकों का कहना है कि यह लगभग 160 प्रतिशत की वृद्धि है, जो नियमों के विपरीत और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली है।
नगर पालिका के प्रस्ताव का किया उल्लेख
नागरिकों ने बताया कि वर्ष 2023 में निर्वाचित नगर पालिका परिषद ने सर्वसम्मति से जलकर को घटाकर 150 रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन शासन से अंतिम स्वीकृति न मिलने के कारण यह अब तक लागू नहीं हो सका।
पेयजल आपूर्ति पर भी उठाए सवाल
ज्ञापन में शहर की पेयजल व्यवस्था को लेकर भी गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गईं। नागरिकों का कहना है कि शहर के अधिकांश क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर, जबकि कुछ इलाकों में तीन दिन के अंतराल पर पानी की आपूर्ति हो रही है। साथ ही कई स्थानों पर दूषित पानी मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
नियमों का दिया हवाला
ज्ञापन में मध्यप्रदेश नगरपालिका (कराधान) नियम, 2016 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि किसी भी कर या शुल्क में वार्षिक वृद्धि 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। नागरिकों ने दावा किया कि 160 प्रतिशत की वृद्धि नियमों के अनुरूप नहीं है।
इन दावों की वैधानिक स्थिति पर संबंधित प्रशासनिक स्तर पर निर्णय होना शेष है।
कलेक्टर से की गई प्रमुख मांगें
नागरिकों ने कलेक्टर से मांग की कि शासन की अंतिम स्वीकृति मिलने तक 260 रुपये प्रतिमाह जलकर की वसूली स्थगित की जाए और नगर पालिका परिषद के प्रस्ताव के अनुसार 150 रुपये प्रतिमाह की दर लागू की जाए।
इसके अलावा बरीघाट वॉटर फिल्टर प्लांट को सुदृढ़ करने, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने की भी मांग की गई।
प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
बढ़ते जल संकट और जलकर दरों को लेकर यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब नागरिकों की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और निर्णय पर टिकी हैं।
