रिपोर्ट कबीर
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल परिसर में तीन वर्षीय मासूम बच्ची पर आवारा कुत्तों के जानलेवा हमले के मामले ने तूल पकड़ लिया है। रविवार को हुई इस दर्दनाक घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार सुबह मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सुनील तेवतिया स्वयं जिला अस्पताल पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
सीएमओ ने अस्पताल में भर्ती घायल बच्ची मीरद का हालचाल जाना और उसके परिजनों से मुलाकात कर बेहतर उपचार का भरोसा दिलाया। उन्होंने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि बच्ची के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और उसे हर संभव उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
घटना के बाद सीएमओ ने जिला अस्पताल परिसर का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में घूम रहे आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीर मानते हुए वरिष्ठ चिकित्सकों और अधिकारियों के साथ आपात बैठक की गई। बैठक में अस्पताल परिसर को सुरक्षित बनाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रणनीति तैयार की गई।
सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया ने बताया कि अस्पताल परिसर से आवारा कुत्तों को पकड़वाने के लिए नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को आधिकारिक पत्र भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीजों, तीमारदारों और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में भी अस्पताल प्रशासन द्वारा आवारा कुत्तों को हटाने के लिए अभियान चलाया गया था, लेकिन कुछ पशु प्रेमियों के विरोध और कानूनी अड़चनों के कारण कार्रवाई प्रभावित हो गई थी। हालात को देखते हुए अब प्रभावी कदम उठाना आवश्यक हो गया है।
सीएमओ ने तीमारदारों से अपील करते हुए कहा कि अस्पताल परिसर में अपने छोटे बच्चों पर विशेष नजर रखें, क्योंकि आवारा कुत्तों के हमलों का सबसे आसान शिकार अक्सर मासूम बच्चे ही बनते हैं।
गौरतलब है कि रविवार शाम जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड के बाहर सहारनपुर निवासी एक मरीज के साथ आई तीन वर्षीय बच्ची मीरद पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया था। कुत्तों ने बच्ची को जमीन पर गिराकर बुरी तरह नोच डाला, जिससे उसके शरीर पर कई गंभीर घाव हो गए। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया।
घटना के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया था। अब प्रशासन की सक्रियता के बावजूद बड़ा सवाल यह है कि जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में आवारा कुत्तों का आतंक कब खत्म होगा और मरीजों की सुरक्षा कब सुनिश्चित हो सकेगी।
