रिपोर्ट: कबीर
मुजफ्फरनगर। पौराणिक तीर्थनगरी शुकतीर्थ में गंगा के घटते जल स्तर, गंगा घाटों पर फैली गंदगी और चल रहे विकास कार्यों में अव्यवस्थाओं को लेकर साधु-संतों में रोष बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में मीरापुर विधायक मिथलेश पाल की पुत्री सुप्रिया पाल ने सोमवार को शुकतीर्थ पहुंचकर विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया और संबंधित विभागों के अधिकारियों से बातचीत कर नाराजगी व्यक्त की।
निरीक्षण के दौरान सुप्रिया पाल ने गंगा स्नान घाट पर फैली गंदगी, निर्माणाधीन आरती स्थल से उत्पन्न हो रही समस्याओं तथा कार्यों में बरती जा रही लापरवाही पर चिंता जताई। उन्होंने सीएनडीएस एवं ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों को व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए।
महामंडलेश्वर स्वामी गोपालदास ने बताया कि शुकतीर्थ में विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर लगभग डेढ़ सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन योजनाबद्ध तरीके से कार्य नहीं होने के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गंगा का जल स्तर लगातार घट रहा है और इसे बनाए रखने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि गंगा घाट पर निर्मित भवन के द्वार एवं आंतरिक निर्माण कार्य क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। वहीं बड़ी लागत से स्थापित की गई एलईडी स्क्रीन, जिस पर शुकतीर्थ का इतिहास और धार्मिक महत्व प्रदर्शित किया जाना था, उपयोग के अभाव में निष्क्रिय पड़ी हुई है। साधु-संतों का यह भी आरोप है कि आरती स्थल सहित अन्य विकास कार्यों में उनकी राय और सुझाव नहीं लिए जा रहे हैं।
कथा व्यास अजय कृष्ण शास्त्री ने कहा कि शुकतीर्थ में गंगा संरक्षण, विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य योजनाबद्ध ढंग से नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मूलभूत समस्याएं आज भी बनी हुई हैं।
साधु-संतों ने इन मुद्दों को लेकर मंगलवार को पंचायत बुलाने का निर्णय लिया है। पंचायत में तीर्थनगरी की समस्याओं, गंगा के जल स्तर और विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इस दौरान मंडल अध्यक्ष अरुण पाल, विधायक पति अमरनाथ पाल, सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर रविंद्र कुमार, अवर अभियंता रामवीर सिंह, अमरकांत, ड्रेनेज विभाग के अवर अभियंता संजीव मलिक, विनोद शर्मा, डॉ. महकार सिंह, बिन्नू राठी, वरुण सहरावत, देवेंद्र आर्य, विनोद पाल, विक्रम सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
