मुजफ्फरनगर में किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली अनुदानित यूरिया खाद के कथित दुरुपयोग और अवैध कारोबार का एक बड़ा मामला सामने आया है। जानसठ पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो कथित रूप से किसानों के हिस्से की सब्सिडी वाली यूरिया को औद्योगिक उपयोग के लिए दूसरे राज्यों तक पहुंचा रहा था। इस कार्रवाई में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बड़ी मात्रा में यूरिया, वाहन और फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई क्षेत्राधिकारी जानसठ सुश्री ऋषिका सिंह के निर्देशन में थाना जानसठ पुलिस और एसओजी देहात टीम द्वारा की गई। जांच एजेंसियों को सूचना मिली थी कि कुछ वाहन बड़ी मात्रा में यूरिया खाद लेकर क्षेत्र से गुजरने वाले हैं और उनके आगे-पीछे कुछ लोग निगरानी कर रहे हैं।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने कवाल पुल के समीप बैरियर लगाकर वाहनों की जांच शुरू की। कुछ समय बाद एक कार, एक कैंटर और दो पिकअप वाहनों को रोककर तलाशी ली गई। जांच के दौरान वाहनों में बड़ी मात्रा में यूरिया खाद लदी हुई मिली।
20 हजार किलो से अधिक यूरिया बरामद
तलाशी के दौरान कुल 454 कट्टों में भरी लगभग 20,430 किलोग्राम अनुदानित यूरिया बरामद की गई। पुलिस ने मौके से दो पिकअप वाहन, एक कैंटर, एक कार और कई दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार बरामद सामग्री और वाहनों की कुल कीमत लगभग 60 लाख रुपये बताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कृषि विभाग के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया।
फर्जी बिलों का इस्तेमाल करने का आरोप
जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया द्वारा मौके पर उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और बिलों की जांच की गई। जांच में कई बिल संदिग्ध पाए गए। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कुछ दस्तावेज फर्जी प्रतीत हुए, जिसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई।
पुलिस का मानना है कि फर्जी बिलों के माध्यम से खाद की वास्तविक खरीद और परिवहन को छिपाने का प्रयास किया जा रहा था। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इन दस्तावेजों को तैयार करने में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
कैसे काम करता था कथित नेटवर्क?
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाली यूरिया को अधिक कीमत देकर खरीदता था। इसके बाद उस खाद को दूसरे राज्यों में स्थित कुछ औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाया जाता था।
अधिकारियों के अनुसार हरियाणा के यमुनानगर क्षेत्र में स्थित कुछ प्लाईवुड उद्योगों में तकनीकी ग्रेड यूरिया की जगह अनुदानित कृषि यूरिया का इस्तेमाल ग्लू और अन्य उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा था। यदि जांच में यह तथ्य पूरी तरह सही पाया जाता है तो यह सरकारी सब्सिडी के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।
आठ आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें सहारनपुर के तनवीर तेली और रियासत शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा के यमुनानगर निवासी राहिल राणा, मोहित और मनीष को भी गिरफ्तार किया गया है।
मुजफ्फरनगर जनपद से गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भोपा क्षेत्र निवासी सौरभ उर्फ हिमांशु, रोहन उर्फ प्रियांशु तथा सूर्य प्रताप उर्फ तुषार शामिल हैं।
पुलिस इन सभी आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाने में जुटी हुई है।
छह महीने में लाखों किलो यूरिया के कारोबार का दावा
पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जिनकी सत्यता की जांच अभी जारी है। पुलिस का दावा है कि यह नेटवर्क पिछले लगभग छह महीनों के दौरान करीब 15.12 लाख किलोग्राम अनुदानित यूरिया के अवैध कारोबार में शामिल रहा हो सकता है।
यदि जांच में यह आंकड़ा सही पाया जाता है तो यह क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी से जुड़े सबसे बड़े मामलों में से एक माना जाएगा। इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया के कृषि क्षेत्र से हटकर अन्य उपयोग में जाने से किसानों को मिलने वाली खाद की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।
किसानों और सरकारी व्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार किसानों को राहत देने के उद्देश्य से यूरिया पर भारी सब्सिडी उपलब्ध कराती है। यदि ऐसी खाद का उपयोग कृषि क्षेत्र के बजाय औद्योगिक कार्यों में होने लगे तो इसका सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है।
इसके अलावा सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता का उद्देश्य भी प्रभावित होता है। यही कारण है कि ऐसे मामलों को आवश्यक वस्तु अधिनियम और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत गंभीरता से लिया जाता है।
दर्ज हुआ मुकदमा, जांच जारी
पुलिस ने इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
खाद विक्रेताओं, परिवहन से जुड़े व्यक्तियों और संभावित औद्योगिक इकाइयों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि मामले में आगे और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
एसएसपी ने टीम को किया सम्मानित
इस कार्रवाई के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने प्रेस वार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने संयुक्त टीम की सराहना करते हुए कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एसएसपी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली पुलिस और एसओजी टीम को प्रोत्साहन स्वरूप 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा भी की।
निष्कर्ष
मुजफ्फरनगर में सामने आया यह मामला किसानों के लिए निर्धारित अनुदानित यूरिया के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। पुलिस की कार्रवाई के बाद एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने का दावा किया गया है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
