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सोशल मीडिया की दोस्ती बनी करोड़ों की ठगी का जाल, 1.01 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी में गिरोह का सदस्य गिरफ्तार

रिपोर्ट: कबीर ब्यूरो

मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

फेसबुक फ्रेंडशिप से शुरू हुआ करोड़ों की साइबर ठगी का खेल

सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। मुजफ्फरनगर में सामने आया एक मामला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कैसे साइबर अपराधी पहले दोस्ती का जाल बुनते हैं और फिर लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर देते हैं। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऐसे ही एक अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य को गिरफ्तार किया है, जिस पर एक व्यक्ति से 1 करोड़ 1 लाख 2 हजार रुपये की ठगी करने का आरोप है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि साइबर ठगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक का इस्तेमाल करते हुए पीड़ित को अपने जाल में फंसाया और फिर फर्जी निवेश योजना के जरिए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

‘गीतिका कपूर’ बनकर बनाया भरोसे का रिश्ता

पुलिस के अनुसार इस पूरे साइबर फ्रॉड की शुरुआत फेसबुक पर हुई। गिरोह की ओर से एक महिला की फर्जी पहचान बनाई गई, जिसने स्वयं को “गीतिका कपूर उर्फ जीजी” बताया।

सबसे पहले पीड़ित को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई और धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई। नियमित बातचीत के जरिए आरोपी पक्ष ने पीड़ित का विश्वास जीत लिया। कुछ समय बाद यह संवाद दोस्ती से आगे बढ़कर भावनात्मक विश्वास के स्तर तक पहुंच गया।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी भावनात्मक जुड़ाव का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं, क्योंकि भरोसा बनने के बाद लोग बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के आर्थिक फैसले लेने लगते हैं।

ऑनलाइन निवेश का दिया गया लालच

विश्वास कायम होने के बाद पीड़ित को ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के क्षेत्र में बड़े मुनाफे का सपना दिखाया गया। उसे बताया गया कि एक विशेष निवेश प्लेटफॉर्म के माध्यम से कम समय में भारी लाभ कमाया जा सकता है।

ठगों ने पीड़ित को DGXC नामक एक वेबसाइट पर निवेश करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में निवेश पर काल्पनिक लाभ दिखाया गया ताकि पीड़ित का भरोसा और मजबूत हो सके।

यही वह चरण था जहां से करोड़ों रुपये की ठगी का सिलसिला शुरू हुआ।

व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी आंकड़ों से बढ़ाया भरोसा

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने केवल वेबसाइट तक ही सीमित न रहते हुए एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया। इस ग्रुप में निवेश से जुड़े सकारात्मक संदेश, मुनाफे के दावे और फर्जी सफलता की कहानियां साझा की जाती थीं।

वेबसाइट पर भी लगातार करोड़ों रुपये का काल्पनिक लाभ दिखाया जाता रहा। जब भी पीड़ित अपने निवेश की स्थिति देखता, उसे लाभ ही लाभ दिखाई देता था।

इन सबका उद्देश्य केवल एक था—पीड़ित को लगातार और अधिक धन निवेश करने के लिए प्रेरित करना।

अलग-अलग खातों में जमा कराए गए 1.01 करोड़ रुपये

पुलिस के अनुसार ठगों ने विभिन्न बहानों और मुनाफे के लालच में पीड़ित से अलग-अलग तिथियों में कुल 1 करोड़ 1 लाख 2 हजार रुपये विभिन्न बैंक खातों में जमा करा लिए।

जब तक पीड़ित को धोखाधड़ी का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसके द्वारा निवेश की गई पूरी धनराशि साइबर अपराधियों के नेटवर्क में पहुंच चुकी थी।

यह मामला साइबर अपराध के उन बड़े मामलों में शामिल है, जिनमें अपराधियों ने योजनाबद्ध तरीके से लंबे समय तक विश्वास कायम कर भारी रकम की ठगी की।

पैसा निकालने पर शुरू हुए नए बहाने

जब पीड़ित ने वेबसाइट पर दिखाई जा रही राशि को निकालने की कोशिश की, तब साइबर अपराधियों ने नए-नए बहाने बनाने शुरू कर दिए।

उसे बताया गया कि धनराशि निकालने से पहले “फाइनल वेरिफिकेशन” पूरा करना होगा। इसके बाद “डेटा रिपेयरिंग शुल्क” और “एंटी मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया” के नाम पर अतिरिक्त धन जमा कराने की मांग की गई।

यहीं से पीड़ित को शक हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है और उसने पुलिस से संपर्क किया।

साइबर पुलिस की जांच में मिली सफलता

मामले की जांच साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह के नेतृत्व में की गई। तकनीकी विश्लेषण और बैंकिंग लेन-देन की जांच के आधार पर पुलिस एक आरोपी तक पहुंचने में सफल रही।

पुलिस ने निखिल त्रिपाठी नामक आरोपी को गिरफ्तार किया, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश का निवासी है और वर्तमान में इंदौर में रह रहा था।

गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, छह एटीएम कार्ड, निर्वाचन पहचान पत्र, पैन कार्ड और नकदी बरामद की गई।

पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा

पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां पुलिस को दीं। उसने बताया कि वह बी.कॉम. तक शिक्षित है और इंदौर की एक निजी कंपनी में नौकरी करता था।

उसकी मुलाकात टेलीग्राम के माध्यम से T1_Thomson नामक व्यक्ति से हुई थी। उस व्यक्ति ने बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले चार प्रतिशत कमीशन देने का प्रस्ताव दिया था।

आर्थिक लाभ के लालच में आरोपी ने अपनी फर्म “श्री राम एंटरप्राइजेज” के बैंक खाते की जानकारी गिरोह को उपलब्ध करा दी।

बैंक खाते से हुआ करोड़ों का लेन-देन

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी के बैंक खाते का उपयोग साइबर ठगी के लिए किया गया। गिरोह ने पहले एक एपीके फाइल भेजकर खाते की टेस्टिंग की और उसके बाद उसी खाते का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर धनराशि के लेन-देन में किया।

जांच में पता चला है कि इस खाते के माध्यम से लगभग 2.34 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया।

यह जानकारी सामने आने के बाद पुलिस अब पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है।

24.71 लाख रुपये फ्रीज, राहत की उम्मीद

साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी गई रकम में से 24.71 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं। अब इस धनराशि को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से पीड़ित को वापस दिलाने की कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य खातों की भी पहचान की जा रही है ताकि अधिक से अधिक धनराशि रिकवर की जा सके।

देशभर में दर्ज हैं कई शिकायतें

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी के बैंक खाते से जुड़े मामलों में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 40 साइबर शिकायतें दर्ज पाई गई हैं।

इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क है, जो लंबे समय से सक्रिय हो सकता है।

पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।

साइबर विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्तियों से मित्रता, ऑनलाइन निवेश में असामान्य मुनाफे के दावे और बिना नियामक मान्यता वाले निवेश प्लेटफॉर्म साइबर अपराधियों के प्रमुख हथियार बन चुके हैं।

लोगों को किसी भी निवेश से पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति कम समय में अत्यधिक लाभ का दावा करता है, तो उससे सावधान रहना आवश्यक है।

निष्कर्ष

मुजफ्फरनगर साइबर पुलिस द्वारा करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी से जुड़े गिरोह के सदस्य की गिरफ्तारी साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह मामला लोगों के लिए भी एक चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर बनी दोस्ती और निवेश के आकर्षक प्रस्ताव हमेशा सुरक्षित नहीं होते। विशेषज्ञों और पुलिस की सलाह है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें और संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करें।

ब्यूरो रिपोर्ट: कबीर

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