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बिजनौर में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी का कथित रिश्वत लेते वीडियो वायरल, डीएम ने दिए जांच के निर्देश

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी पर कथित रूप से रिश्वत लेने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के समीपुर स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद देशवाल से संबंधित है। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें दिखाई दे रही परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?

सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में एक व्यक्ति कथित रूप से कुछ रुपये लेते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो में बातचीत के दौरान एक आवाज सुनाई देती है जिसमें कहा जा रहा है कि, “तेरे पास तीन-तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं।”

वीडियो साझा करने वाले लोगों का दावा है कि यह राशि एक झोलाछाप डॉक्टर से ली जा रही थी। हालांकि इस दावे की पुष्टि अभी तक प्रशासनिक स्तर पर नहीं हुई है। यही कारण है कि मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं।

प्रशासन ने लिया मामले का संज्ञान

वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया है। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने मामले की जांच कराने के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि वायरल वीडियो की सत्यता, परिस्थितियों और संबंधित पक्षों की भूमिका की विस्तृत जांच की जाएगी।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या अवैध वसूली की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग में बढ़ी हलचल

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में चर्चा का माहौल बना हुआ है। विभागीय अधिकारियों के बीच भी इस घटना को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान वायरल वीडियो की तकनीकी जांच, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी शामिल किया जा सकता है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल

इस घटना ने सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। आम लोगों का कहना है कि यदि किसी सरकारी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं तो निष्पक्ष और त्वरित जांच होना जरूरी है ताकि जनता का विश्वास बना रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में ऐसे मामलों की गंभीरता और बढ़ जाती है। इसलिए किसी भी वायरल वीडियो के आधार पर तुरंत निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्यों की जांच आवश्यक होती है।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच जारी है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावे कितने सही हैं और क्या वास्तव में किसी प्रकार की अवैध वसूली हुई थी।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो जांच रिपोर्ट के माध्यम से वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।

फिलहाल बिजनौर का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।

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