रिपोर्ट: कबीर
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में महिला आरक्षण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। गुरुवार को रुड़की रोड स्थित होटल ग्रीन एप्पल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला और महिला आरक्षण के विरोध को “महिला विरोधी मानसिकता” करार दिया।
संगठन की ओर से इंडी गठबंधन के दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के मुद्दे पर राजनीति करना देशहित के खिलाफ है।
महिला आरक्षण को बताया ऐतिहासिक कदम
पत्रकार वार्ता के दौरान नगर पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि देश की महिलाएं लंबे समय से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं का सामना करती रही हैं। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में बराबरी दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को राजनीतिक नजरिए से देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कानून महिलाओं को लोकतंत्र में अधिक भागीदारी देने की दिशा में मजबूत पहल साबित होगा।
33 प्रतिशत आरक्षण से बढ़ेगी भागीदारी
प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मंडल प्रभारी कृष्ण गोपाल मित्तल ने कहा कि इस कानून के जरिए लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता साफ हुआ है।
उन्होंने कहा कि इससे देश की आधी आबादी को नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी मिलेगी। उनके अनुसार यह केवल एक कानून नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव है, जो महिलाओं को नेतृत्व, शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई ताकत देगा।
विपक्षी दलों पर लगाए आरोप
व्यापार संगठन ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और डीएमके सहित इंडी गठबंधन के दलों पर महिला सशक्तिकरण जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि विपक्ष का रवैया महिलाओं के प्रति उनकी संकीर्ण सोच को दर्शाता है। उनका आरोप था कि कई विपक्षी दल समय-समय पर अपने बयानों के जरिए महिलाओं का अपमान करते रहे हैं और अब महिला आरक्षण जैसे कदम का विरोध कर उनकी मानसिकता फिर सामने आ गई है।
महिलाओं के अधिकार को बताया राष्ट्रीय मुद्दा
वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं के अधिकार किसी राजनीतिक दल विशेष का विषय नहीं बल्कि राष्ट्र के विकास और लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का अवसर मिलेगा तो देश के विकास को नई दिशा मिलेगी और समाज में सकारात्मक बदलाव आएंगे।
सरकार से प्रभावी लागू करने की मांग
व्यापार संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की। संगठन ने कहा कि इसके लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने, संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और मजबूत निगरानी तंत्र विकसित करने की जरूरत है।
संगठन का कहना है कि देश की हर महिला तक इस कानून का वास्तविक लाभ पहुंचना चाहिए।
बड़ी संख्या में व्यापारी और पदाधिकारी रहे मौजूद
पत्रकार वार्ता में गौरव स्वरूप, सरदार बलविंदर सिंह, राकेश त्यागी, संजय मिश्रा, विशाल जैन, डॉ. तुलसी भारद्वाज, पवन वर्मा, तरुण मित्तल, आनंद गुप्ता, शिव कुमार सिंघल, दीपांशु कुछचाल, विजय प्रताप, भूपेंद्र गोयल, मयंक गोयल, राजेंद्र अरोरा, उदित किंगर, विक्की अरोरा, सुनील वर्मा, रोहित अरोरा, अंशुल सिंघल, अरुण कुछल, अमित गुप्ता, अनिल कुमार, प्रमोद गर्ग, राजन माहेश्वरी, निवेश कुमार, शालिनी कौशिक, मेनका शर्मा, कल्पना ठाकुर, पिंकी चौधरी, रेनू वर्मा, गीता ठाकुर, रीना जैन, सोनू ठाकुर, गीता गुज्जर, कोमल कश्यप, कविता धीमान और सुधा सहित बड़ी संख्या में व्यापारी और संगठन पदाधिकारी मौजूद रहे।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
महिला आरक्षण को लेकर हुई इस पत्रकार वार्ता के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
