कसराँव में फूहड़ कथित डांस कार्यक्रम रात्रि गश्त पर उठे सवाल
अनुमति सांस्कृतिक कार्यक्रम की, मंच पर चला बार बालाओं का डांस—प्रशासन गुमराह
एसडीएम खागा को गलत जानकारी देकर कराया गया बार बालाओं का नृत्य कार्यक्रम
पहले हीं दर्ज हो चुकी थी आपत्तियां फिर भी नहीं थमी गलत गतिविधियां
थाना हथगाम के पास बार बालाओं का डांस—पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
रिपोर्ट – पवन कुमार श्रीमाली

फतेहपुर। जिले के कसराँव गाँव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाने से महज कुछ दूरी पर धार्मिक आयोजन के नाम पर कथित तौर पर बार -बाला डांस का कार्यक्रम पूरी रात तक चलता रहा, लेकिन पुलिस को इसकी जानकारी नहीं होने का दावा किया जा रहा है
हथगाम थाना क्षेत्र के कसराँव गांव में कानून व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। थाने से महज 5 किलो मीटर की दूरी पर स्थित कासराँव गांव में सिद्ध पीठ अम्मल बाबा मंदिर के वार्षिकोत्सव के दौरान दो रातों तक लगता है मेला वहीं खुले मंच पर बार बालाओं का फूहड़ डांस चलता रहा, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी

अनुमति सांस्कृतिक कार्यक्रम की और, हो रहा कुछ और
मिली जानकारी के अनुसार
मंदिर में दो दिवसीय कार्यक्रम की अनुमति मांगी गई थी लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर रातभर बार बालाओं हो रहा कथित डांस आयोजकों ने कथित तौर पर प्रशासन को गुमराह किया पुलिस की गश्त पर गंभीर सवाल कार्यक्रम स्थल थाने से मात्र 5किलो मीटर दूर पूरी रात तक चलता रहा बार बालाओं का डांस पुलिस को भनक तक नहीं लगना सवाल खड़े करता है इससे साफ है कि रात्रिकालीन गश्त व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं स्थानीय पुलिस की निगरानी पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है पुलिस आपत्ति के बावजूद ऐसी घटना सामने आना गंभीर चिंता का विषय है
यदि पूरे मामले की हो जांच तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होना तय
रात्रि गश्त व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए ताकि ऐसी कथित पुनरावृति दोबारा ना हो हथगाम थाना क्षेत्र मे बार बालाओं का डांस—पुलिस को भनक तक नहीं, गश्त व्यवस्था पर उठे सवाल प्रशासन अब पूरे मामले की जांच की बात कहेगा लेकिन यह घटना निगरानी व्यवस्था और अनुमति प्रक्रिया—दोनों पर सवाल खड़े करती है। यदि हो रहा था बार-बालाओं का डांस तो गश्त व्यवस्था कहां थी ऐसे सवाल सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं रहते—ये सिस्टम की जवाबदेही तय करते हैं अब देखना यह होगा कि कार्रवाई होती है या सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है।

