मरौली के सीने पर माफिया का प्रहार, प्रशासन मौन।

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खंड 4 और 6 में ‘नदी का कत्ल’, एनजीटी के नियमों को ठेंगे पर रख बीच जलधारा में चल रही हैं मशीनें


रिपोर्ट – शुभम सिंह

बांदा। बुंदेलखंड की प्यास बुझाने वाली केन नदी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर दूर सदर तहसील के मरौली खंड संख्या 4 और 6 में खनन का जो खेल चल रहा है, वह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि प्रकृति के साथ एक ऐसा अपराध है जिसकी भरपाई आने वाली पीढ़ियां भी नहीं कर पाएंगी। प्रशासनिक संरक्षण और खनन माफियाओं के गठजोड़ ने नदी को रेत की मंडी में तब्दील कर दिया है।


नियमों की धज्जियां: जलधारा के बीच मशीनों का कब्जा
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और खनन नियमावली के स्पष्ट निर्देश हैं कि नदी के बीच जलधारा से खनन नहीं किया जा सकता और पोकलैंड जैसी भारी मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है। लेकिन मरौली में हकीकत इसके उलट है:
बीच नदी में खुदाई: पोकलैंड मशीनें नदी की मुख्य धारा के भीतर घुसकर बालू निकाल रही हैं।


अवैध पुल और रास्ते: पट्टेदारों ने अपनी सुविधा के लिए नदी का प्राकृतिक बहाव रोककर अवैध अस्थायी रास्ते (रपटा) बना लिए हैं।
रेड लाइन पार: स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक गहराई और दायरे में खुदाई कर नदी की तलहटी को खोखला किया जा रहा है।
ओवरलोडिंग और सड़कों की बदहाली
ग्रामीणों का आरोप है कि दिन के उजाले से ज्यादा रात के अंधेरे में खौफनाक मंजर होता है। दर्जनों ओवरलोडेड ट्रक और डंपर गांव की सड़कों से गुजरते हैं, जिससे न केवल धूल का गुबार उड़ता है बल्कि सड़कें भी पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। ओवरलोडिंग का यह खेल खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़ा करता है।

“दाल ही पूरी काली है…”
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। जब भी कोई टीम निरीक्षण के लिए आती है, मशीनों को पहले ही हटा दिया जाता है। यह स्पष्ट करता है कि विभाग के भीतर ही कोई ‘विभीषण’ है जो माफियाओं को सूचना लीक करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इसी तरह नदी के बहाव को मोड़ा गया और तलहटी के साथ छेड़छाड़ की गई, तो आगामी मानसून में केन नदी अपना रास्ता बदल सकती है। इससे मरौली और आसपास के दर्जनों गांवों में बाढ़ का भारी खतरा पैदा हो सकता है।

केन नदी महज एक बालू का स्रोत नहीं, बल्कि बांदा की संस्कृति और जीवन का आधार है। यदि समय रहते इन ‘सफेदपोश’ माफियाओं पर लगाम नहीं कसी गई, तो ‘नदी का कत्ल’ करने वाले ये लोग बांदा को एक सूखे रेगिस्तान की ओर धकेल देंगे। TNI 24 इस मुद्दे को तब तक उठाता रहेगा, जब तक धरातल पर बदलाव नहीं दिखता।

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