रिपोर्ट – शुभम सिंह
बांदा। स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खातों और लोन स्वीकृति में बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। प्रयागराज से आई लेखा विभाग की दो सदस्यीय ऑडिट टीम ने जांच के दौरान तिंदवारी पीएचसी में तैनात आप्टोमेट्रिस्ट के जीपीएफ खाते में गड़बड़ी पकड़ी है। आरोप है कि जीपीएफ खाते में उपलब्ध धनराशि से अधिक रकम दर्शाकर करीब 35 लाख रुपये का लोन लिया गया।
ऑडिट के दौरान सामने आया कि संबंधित कर्मचारी के जीपीएफ खाते से पहले निकाली गई धनराशि को खाते में समायोजित या कटौती के रूप में नहीं दर्शाया गया था। इसके चलते जीपीएफ खाते में वास्तविक धनराशि से अधिक रकम दिखाई गई और इसी आधार पर लोन स्वीकृत होने की बात सामने आई है।
प्रयागराज से आई ऑडिट टीम ने बांदा स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों के जीपीएफ खातों और उनके द्वारा लिए गए लोन से संबंधित अभिलेखों की जांच की। जांच में तिंदवारी पीएचसी में तैनात आप्टोमेट्रिस्ट देवेंद्र कुमार के खाते में यह अनियमितता सामने आई। टीम जीपीएफ और लोन से जुड़े कई दस्तावेज अपने साथ प्रयागराज ले गई है। वहां अभिलेखों का मिलान करने के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
चित्रकूटधाम मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डा. अभय सिंह ने बताया कि ऑडिट टीम दस्तावेजों का मिलान कर रही है। प्रारंभिक जांच में तिंदवारी के आप्टोमेट्रिस्ट द्वारा जीपीएफ की धनराशि अधिक दर्शाकर करीब 35 लाख रुपये का लोन लेने की बात सामने आई है। पूर्व में जीपीएफ से निकाली गई धनराशि को खाते में समायोजित नहीं दिखाया गया था।
उन्होंने बताया कि संबंधित आप्टोमेट्रिस्ट के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। साथ ही सीएमओ को विभागीय कार्रवाई करने और अधिक निकाली गई धनराशि की रिकवरी कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक इसी तरह का एक मामला महोबा जिले में भी स्वास्थ्य विभाग के एक लिपिक से जुड़ा सामने आ चुका है। हालांकि बांदा में ऑडिट के दौरान अन्य कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में भी इस तरह की गड़बड़ी मिली है या नहीं, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऑडिट टीम की रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
