रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। आठ दिन से चल रहा एनएचएम संविदा कर्मचारियों का आंदोलन लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। प्रदेश स्तर पर मिशन निदेशक के साथ हुई वार्ता में कई मांगों पर सहमति बनने के बाद 17 अक्टूबर से जिले के सभी एनएचएम संविदा कर्मी काम पर लौट आए। वेतन वृद्धि, ग्रेच्युटी, ईपीएफ, कैशलेस बीमा और अवकाश जैसी सुविधाओं को लेकर कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू किया था।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने आंदोलन के दौरान सहयोग करने वाली जिले की मीडिया का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मीडिया ने कर्मचारियों की समस्याओं और उनके संघर्ष को निष्पक्षता से अधिकारियों व आमजन तक पहुंचाया। इससे संविदा कर्मियों की आवाज को मजबूती मिली। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के लिए संगठन मीडिया का आभारी रहेगा।
डॉ. राहुल वर्मा ने बताया कि प्रदेश प्रतिनिधिमंडल और मिशन निदेशक के बीच कई दौर की वार्ता के बाद महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी है। न्यूनतम वेतनमान तय करने और वरिष्ठता के आधार पर वेतन वृद्धि की व्यवस्था पर सहमति बनी है। इसके लिए शासन ने 45 दिन का समय मांगा है। ग्रेच्युटी और ईपीएफ की व्यवस्था राज्य सरकार के बजट से करने पर भी सहमति बनी है।
महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव और सभी कर्मचारियों को 15 दिन की विशेष छुट्टी देने के साथ कर्मचारियों व उनके परिजनों को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है। नियमित पदों पर नियुक्ति में संविदा कर्मियों को वरीयता देने तथा एनटीईपी कर्मचारियों के 2,000 रुपये के मोबिलिटी भत्ते को वेतन में शामिल करने के शासनादेश जल्द जारी करने की बात भी कही गई है।
सात, दस और 15 साल की सेवा पूरी करने वालों के लॉयल्टी बोनस की मांग केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। डीए और एचआरए पर सहमति नहीं बन सकी, हालांकि उपलब्धता के अनुसार आवास आवंटित करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। आंदोलन में शामिल कर्मचारियों पर धरने के कारण कार्रवाई नहीं करने पर भी सहमति बनी है।
सीएमओ से मिले, मिठाई बांटकर मनाई खुशी
आंदोलन समाप्त होने के बाद एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया से मुलाकात कर सहयोग के लिए आभार जताया। कर्मचारियों ने सीएमओ को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई। हालांकि, अब कर्मचारियों की निगाहें सहमति के अनुसार शासनादेश जारी होने और मांगों के वास्तविक क्रियान्वयन पर टिकी हैं।
