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निपुण लक्ष्य और मध्यान्ह भोजन व्यवस्था को लेकर शिक्षकों को जिलाधिकारी के निर्देश

नवम्बर तक विद्यालयों को निपुण बनाने का लक्ष्य, शिक्षण व्यवस्था में न हो लापरवाही: जिलाधिकारी

डीएम ने वीसी से शिक्षकों से किया संवाद, स्मार्ट क्लास के नियमित संचालन और टीएलएम के शत-प्रतिशत प्रयोग के दिए निर्देश

रिपोर्ट – शारिक खान

रामपुर। जिलाधिकारी श्री अजय कुमार द्विवेदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद के सभी शिक्षकों के साथ संवाद कर निपुण भारत मिशन, बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (एफएलएन) तथा मध्यान्ह भोजन योजना की व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष निपुण लक्ष्यों का विस्तार कक्षा-5 तक किया गया है, इसलिए सभी शिक्षक पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि बालवाटिका से कक्षा-2 तक हिन्दी एवं गणित तथा कक्षा-3 से कक्षा-5 तक हिन्दी, गणित के साथ अंग्रेजी एवं पर्यावरण अध्ययन में निपुण लक्ष्य प्राप्त किया जाना है।
आगामी माह में प्रस्तावित चुनाव को देखते हुए नवम्बर तक विद्यालयों को निपुण बनाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना के अनुसार शिक्षण कार्य कराया जाए। उन्होंने पिछले वर्ष जनपद में 43 प्रतिशत विद्यालयों के निपुण घोषित होने का उल्लेख करते हुए इस वर्ष बेहतर परिणाम के लिए सभी शिक्षकों को विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के माध्यम से शिक्षण कार्य कराया जा रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के वीडियो रिकॉर्डिंग रूम से यू-ट्यूब लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने स्मार्ट क्लास का नियमित एवं शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
डीएम ने समयसारणी, संदर्शिका एवं टीएलएम का शत-प्रतिशत प्रयोग, कैच-अप शिक्षण तथा टेन प्वाइंट्स टूलकिट का प्रत्येक कक्षा में उपयोग सुनिश्चित कराने को कहा। बालवाटिका स्तर से ही भाषा, गणित, अंग्रेजी एवं पर्यावरण पर विशेष ध्यान देने तथा भाषा एवं साक्षरता विकास की कार्यपुस्तिका व संदर्शिका का प्रभावी उपयोग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि बालवाटिका की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ईसीसीई एजुकेटर्स की नियुक्ति भी की जा रही है।

मीनू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन सुनिश्चित करें

जिलाधिकारी ने मध्यान्ह भोजन योजना की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में शासन द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार ही भोजन तैयार एवं वितरित किया जाए। भोजन की गुणवत्ता, मात्रा एवं पोषक तत्व निर्धारित मानकों के अनुरूप हों तथा मीनू चार्ट विद्यालय के सूचना पट्ट पर प्रदर्शित किया जाए। निर्धारित दिवस पर बच्चों को दूध एवं फल का वितरण अनिवार्य रूप से कराने तथा उसका अलग से रजिस्टर में अंकन करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि भोजन परोसने से पूर्व शिक्षक स्वयं भोजन की गुणवत्ता एवं स्वच्छता की जांच करें।

हर विद्यालय में माह में कम से कम पांच बार हो तिथि भोजन

डीएम ने प्रत्येक विद्यालय में माह में कम से कम पांच बार तिथि भोजन आयोजित कराने के निर्देश दिए। इसके लिए ग्राम प्रधान, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों को आमंत्रित किया जाए। तिथि भोजन से संबंधित फोटो, उपस्थिति पंजिका एवं व्यय विवरण विद्यालय में सुरक्षित रखा जाए।

एप्रिन और टोपी पहनकर ही भोजन तैयार करें रसोइये

उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यालयों में भोजन तैयार करने वाले सभी रसोइये अनिवार्य रूप से एप्रन, टोपी अथवा सिर ढकने वाले वस्त्र तथा साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही भोजन तैयार करें। भोजन बनाने से पहले हाथ धोने, नाखून काटने और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। रसोइयों के ड्रेस के लिए निर्धारित धनराशि का स्थानांतरण किया जा चुका है।

विद्यालयों में विकसित हों किचन गार्डन

जिलाधिकारी ने प्रत्येक विद्यालय में उपलब्ध भूमि पर किचन गार्डन विकसित करने के निर्देश दिए। इसमें पालक, धनिया, टमाटर, मूली सहित मौसमी सब्जियां उगाई जाएं। भूमि उपलब्ध न होने वाले विद्यालयों में गमलों अथवा क्रेट में सब्जियां उगाने की व्यवस्था की जाए। किचन गार्डन की जिम्मेदारी एक-दो शिक्षकों को देते हुए बच्चों को भी इससे जोड़ा जाए तथा उत्पादित ताजी सब्जियों का उपयोग मध्यान्ह भोजन में किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि निपुण लक्ष्य की प्राप्ति और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, पोषणयुक्त शिक्षा एवं भोजन उपलब्ध कराना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए

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