रिपोर्टर: शारिक खान, रामपुर
पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रामीणों को किया गया जागरूक
रामपुर जनपद के ग्राम सींगनखेड़ा में वन महोत्सव के अवसर पर ग्रीन चौपाल का आयोजन किया गया। सामाजिक वानिकी प्रभाग रामपुर के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों के बीच पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने लोगों को बताया कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है। यदि सभी लोग मिलकर पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लें, तो आने वाले समय में पर्यावरण संबंधी अनेक समस्याओं का समाधान संभव है।
जुलाई माह में चल रहा है विशेष वृक्षारोपण अभियान
वन महोत्सव के तहत पूरे जुलाई माह में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी अभियान की कड़ी में ग्राम सींगनखेड़ा में आयोजित ग्रीन चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों को वृक्षों के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि लगातार बढ़ते प्रदूषण, तापमान में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सबसे प्रभावी समाधान वृक्ष ही हैं। इसलिए हर व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसे सुरक्षित रखते हुए बड़ा करने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
पेड़ हैं जीवन और पर्यावरण की सबसे बड़ी ताकत
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि पेड़ केवल हरियाली ही नहीं बढ़ाते, बल्कि मानव जीवन को स्वस्थ और सुरक्षित बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं, ऑक्सीजन उपलब्ध कराते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित बनाए रखते हैं और मिट्टी के कटाव को रोकने में भी सहायक होते हैं। इसके अलावा पेड़ अनेक जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास भी हैं, जिससे जैव विविधता सुरक्षित रहती है।
उन्होंने कहा कि यदि आज वृक्षों की संख्या में लगातार कमी आती रही तो भविष्य में जल संकट, अत्यधिक गर्मी और प्रदूषण जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। इसलिए समय रहते सभी लोगों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल भी है जरूरी
ग्रीन चौपाल के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि पौधारोपण केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। कई बार अभियान के दौरान हजारों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उनकी उचित देखभाल नहीं होने के कारण वे नष्ट हो जाते हैं। इसलिए पौधे लगाने के बाद उन्हें नियमित पानी देना, सुरक्षा प्रदान करना और समय-समय पर उनकी निगरानी करना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जब लगाया गया पौधा एक मजबूत वृक्ष बन जाता है, तभी वृक्षारोपण अभियान का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने लगाए गए पौधे की जिम्मेदारी स्वयं निभानी चाहिए।
विभिन्न प्रजातियों के पौधों का किया गया रोपण
वन महोत्सव के अवसर पर ग्राम सींगनखेड़ा में आम, अमरूद, जामुन, आंवला, नीम और इमली सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। इन पौधों का चयन स्थानीय जलवायु और पर्यावरणीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया गया ताकि भविष्य में ये पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए भी उपयोगी साबित हों।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित ग्रामीणों को भी पौधों का वितरण किया गया। सभी से आग्रह किया गया कि वे इन पौधों को अपने घरों, खेतों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाकर उनकी नियमित देखभाल करें।
जनभागीदारी से ही सफल होगा हरित अभियान
अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। केवल सरकारी प्रयासों से पूरे प्रदेश या देश को हराभरा बनाना संभव नहीं है। इसके लिए आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और ग्राम पंचायतों को भी आगे आना होगा।
ग्रीन चौपाल जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों में जागरूकता पैदा करना और उन्हें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराना है। यदि प्रत्येक परिवार हर वर्ष एक या दो पौधे लगाकर उनकी देखभाल करे तो कुछ वर्षों में पूरे क्षेत्र का वातावरण अधिक हराभरा और स्वच्छ बनाया जा सकता है।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, वन दरोगा, वन रक्षक, ग्राम पंचायत अधिकारी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, ग्रामीण तथा क्षेत्र के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पर्याप्त जल और स्वस्थ वातावरण देने के लिए आज से ही वृक्षों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में पौधारोपण को एक नियमित सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाना चाहिए।
निष्कर्ष
ग्राम सींगनखेड़ा में आयोजित ग्रीन चौपाल ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली सामूहिक जिम्मेदारी है। वृक्ष मानव जीवन का आधार हैं और इनके बिना स्वस्थ भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। यदि समाज और प्रशासन मिलकर पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दें, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की जा सकती है। वन महोत्सव जैसे आयोजन लोगों को प्रकृति से जोड़ने और हरित भविष्य की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
