रिपोर्ट: सुदेश वर्मा
बागपत जनपद में बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य अधिकार को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘नन्हीं कली’ मुहिम अब सामाजिक बदलाव की नई मिसाल बनती जा रही है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल से प्रेरित होकर अब निजी चिकित्सक और अस्पताल भी इस अभियान से जुड़ने लगे हैं।
बड़ौत के दो निजी अस्पतालों ने निर्धन और बीपीएल परिवारों की नवजात बच्चियों एवं बच्चों के इलाज में 70 प्रतिशत तक की विशेष छूट देने की घोषणा की है। इस पहल को जिले में बेटियों के प्रति बदलती सकारात्मक सोच का बड़ा संदेश माना जा रहा है।
डीएम ने किया स्वास्थ्य मुहिम का शुभारंभ
बड़ौत स्थित डॉ. नरेंद्र कुमार मूर्ति हॉस्पिटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस विशेष स्वास्थ्य मुहिम की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में जिलाधिकारी अस्मिता लाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
उन्होंने अस्पताल के पीआईसीयू वार्ड का निरीक्षण किया और वहां उपचार करा रही बच्चियों को ‘नन्हीं कली’ देसी डॉल भेंट कर उनका उत्साह बढ़ाया।
डीएम को अपने बीच देखकर बच्चियों और उनके परिजनों के चेहरे खुशी से खिल उठे। अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज में बेटियों के प्रति बदलती सोच का सकारात्मक संकेत बताया।
बेटी के जन्म पर मनाया गया उत्सव
कार्यक्रम के दौरान नवजात कन्याओं का जन्मोत्सव भी विशेष रूप से मनाया गया।
अस्पताल में बेटी के जन्म की सूचना मिलते ही खुशियों का माहौल बन गया। केक काटा गया, नवजात बच्चियों की माताओं को पौधे भेंट किए गए और परिवारों ने मुस्कुराते हुए इस खुशी को साझा किया।
सबसे खास पल तब आया जब “बेटी हुई है” संदेश से सजी विशेष गाड़ी नवजात बच्चियों और उनके परिवारों को लेकर अस्पताल से रवाना हुई।
अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया और इसे समाज में सकारात्मक बदलाव की खूबसूरत तस्वीर बताया।
आर्थिक तंगी बनती है इलाज में सबसे बड़ी बाधा
ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में अक्सर बेटियों के इलाज को लेकर कठिन परिस्थितियां देखने को मिलती हैं।
कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण बीमारी गंभीर होने तक अस्पताल नहीं पहुंच पाते। खासतौर पर नवजात बच्चियों और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज में आने वाला खर्च गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए डॉ. नरेंद्र कुमार मूर्ति हॉस्पिटल और आस्था हॉस्पिटल ने निर्धन और बीपीएल परिवारों के बच्चों के लिए विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू करने का निर्णय लिया है।
इलाज में मिलेगी 70 प्रतिशत तक की छूट
इस विशेष पहल के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत दी जाएगी।
अस्पतालों की ओर से जांच, डायग्नोस्टिक टेस्ट, डॉक्टर परामर्श, भर्ती, नर्सिंग सेवाएं, पीआईसीयू और एनआईसीयू उपचार जैसी सुविधाओं पर 70 प्रतिशत तक की छूट देने की घोषणा की गई है।
इसके साथ ही भर्ती होने वाली प्रत्येक बीपीएल श्रेणी की बालिका को ‘नन्हीं कली’ देसी डॉल भी निःशुल्क भेंट की जाएगी।
चिकित्सकों का कहना है कि इस मुहिम का उद्देश्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों में यह विश्वास पैदा करना भी है कि आर्थिक कमजोरी उनकी बेटियों के स्वास्थ्य अधिकार के बीच बाधा नहीं बनेगी।
बेटियों के प्रति बदल रही सामाजिक सोच
बागपत प्रशासन लगातार बेटियों को लेकर समाज में फैली रूढ़िवादी सोच को बदलने के लिए कई नवाचार कर रहा है।
जिले में बेटियों के नाम की नेमप्लेट लगाने, बेटियों को “कुलदीपक” के रूप में पहचान देने, खाप पंचायतों के बीच बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश पहुंचाने और ‘नन्हीं कली’ जैसी पहलों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
इन अभियानों का असर अब समाज में दिखाई भी देने लगा है, जहां लोग बेटियों के जन्म को गर्व और खुशी के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
बेहतर स्वास्थ्य से कम होगी बाल मृत्यु दर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नवजात बच्चियों और बच्चों को जन्म से ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, तो कुपोषण, गंभीर बीमारियों और बाल मृत्यु दर जैसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज और पोषण मिलने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है।
बागपत में प्रशासन, निजी चिकित्सकों और समाज के संयुक्त प्रयासों को इसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
समाज के लिए प्रेरणा बन रही पहल
‘नन्हीं कली’ मुहिम अब केवल एक सरकारी अभियान नहीं रह गई है, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बनती जा रही है।
लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह समाज, प्रशासन और निजी संस्थाएं मिलकर बेटियों के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए काम करें, तो आने वाले समय में बेटियों के प्रति भेदभाव जैसी समस्याओं को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है।
इस अवसर पर भावना सिंह, राहुल वर्मा सहित कई अधिकारी, चिकित्सक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
