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गुरु पूर्णिमा पर नचिकेता स्कूल्स में गुरुजनों का सम्मान, विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति और आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

ब्यूरो रिपोर्ट: कबीर

गुरु पूर्णिमा पर नचिकेता स्कूल्स में गुरुजनों का हुआ सम्मान, विद्यार्थियों ने लिया आदर्शों पर चलने का संकल्प

मुजफ्फरनगर। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु केवल ज्ञान प्रदान करने वाले शिक्षक ही नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। इसी भावना को साकार करते हुए गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुजफ्फरनगर स्थित नचिकेता स्कूल्स में श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों से परिपूर्ण विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों का पुष्प अर्पित कर सम्मान किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति और गुरु के महत्व को रेखांकित करते हुए विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं, जिन्हें उपस्थित सभी लोगों ने सराहा।

दीप प्रज्ज्वलन और मंत्रोच्चारण से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

गुरु पूर्णिमा समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद सभी ने सामूहिक रूप से “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः” मंत्र का उच्चारण किया। पूरे विद्यालय परिसर में भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण दिखाई दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों को पुष्प अर्पित कर उनका अभिनंदन किया। गुरुजनों ने भी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य और श्रेष्ठ जीवन के लिए आशीर्वाद दिया।

विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीता सभी का मन

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गुरु के महत्व पर आधारित प्रेरणादायक भाषण प्रस्तुत किए। इसके साथ ही उन्होंने कविताएं, गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से गुरु-शिष्य संबंधों की गरिमा को दर्शाया।

इन प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और शिक्षा के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। विद्यालय में उपस्थित शिक्षकों, अभिभावकों और अन्य अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की।

गुरु जीवन के सच्चे मार्गदर्शक हैं: जसबीर कौर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय की उप-प्रधानाचार्या श्रीमती जसबीर कौर ने कहा कि गुरु केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि एक सच्चा गुरु अपने शिष्य को सही और गलत के बीच अंतर समझाने के साथ-साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा भी देता है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को अपने गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए और उनके मार्गदर्शन का पालन करना चाहिए।

गुरुजनों के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान

विद्यालय की उप-प्रधानाचार्या (एडमिनिस्ट्रेशन) विक्की जैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जीवनभर उनके बताए मार्ग पर चलना ही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, ईमानदारी, परिश्रम और अच्छे संस्कारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। साथ ही कहा कि गुरुजनों का सम्मान करने वाला विद्यार्थी जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है।

भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का प्रयास

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि गुरु पूर्णिमा जैसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परंपराओं से परिचित कराना ही नहीं, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों की भावना विकसित करना भी है।

ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं और उन्हें गुरु, माता-पिता तथा समाज के प्रति सम्मान की भावना सिखाते हैं। विद्यालय समय-समय पर इस प्रकार के आयोजन करता है ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

विद्यार्थियों ने लिया सम्मान और कृतज्ञता का संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आदर बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया। उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि वे अपने शिक्षकों द्वारा बताए गए आदर्शों और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करेंगे।

गुरुजनों ने भी विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए उन्हें शिक्षा, अनुशासन और संस्कार के मार्ग पर आगे बढ़ने की शुभकामनाएं दीं।

निष्कर्ष

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर नचिकेता स्कूल्स में आयोजित कार्यक्रम ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों से भरपूर इस आयोजन में विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, संस्कार और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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