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शुकतीर्थ में गंगा का जलस्तर बढ़ा, अमावस्या स्नान से पहले प्रशासन ने श्रद्धालुओं को किया सतर्क

रिपोर्टर : कबीर

लोकेशन : मुजफ्फरनगर (मोरना/शुकतीर्थ)

शिवालिक क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश का असर अब गंगा और उसकी सहायक नदियों पर भी दिखाई देने लगा है। मुजफ्फरनगर के तीर्थस्थल शुकतीर्थ में सोमवार को गंगा का जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। वहीं सोलानी नदी और बाणगंगा के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है। मंगलवार को अमावस्या स्नान को देखते हुए प्रशासन और गंगा पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है तथा श्रद्धालुओं से गहरे पानी में न जाने की अपील की है।

स्नान घाट की निचली सीढ़ियां जलमग्न

बढ़े हुए जलस्तर के कारण शुकतीर्थ स्थित स्नान घाट की निचली सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। गंगा सेवा समिति द्वारा लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार श्रद्धालुओं को सतर्क किया जा रहा है और सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान करने की सलाह दी जा रही है।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे चेतावनी संकेतों का पालन करें और अनावश्यक रूप से गहरे पानी में प्रवेश न करें।

अमावस्या स्नान को लेकर प्रशासन सतर्क

अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और गंगा पुलिस अलर्ट मोड पर हैं। घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

अधिकारियों ने संबंधित विभागों को स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

खेतों में फैला बाढ़ का पानी

लगातार बारिश के कारण सोलानी नदी और बाणगंगा का पानी किनारों से बाहर निकलकर आसपास के खेतों में फैल गया है। इससे कई स्थानों पर कृषि फसलें प्रभावित हुई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार निचले इलाकों में रहने वाले कुछ किसानों ने एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों का रुख किया है तथा पशुपालकों ने भी अपने पशुओं को ऊंचे स्थानों पर पहुंचा दिया है।

नहर में पानी की मात्रा घटाई गई

बारिश के कारण सिंचाई की मांग में कमी आने के बाद गंग नहर में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा कम कर दी गई है। बेलड़ा सिंचाई विभाग के अनुसार सोमवार को बेलड़ा पर नहर में लगभग 4,830 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया, जबकि गंग नहर में लगभग 6,030 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

विभाग के अनुसार वर्तमान समय में मुख्य रूप से धान की फसल के लिए ही सिंचाई की आवश्यकता है, इसलिए जल प्रबंधन के अनुसार नहर के जलस्तर को नियंत्रित किया गया है।

प्रशासन ने नागरिकों और श्रद्धालुओं से मौसम विभाग तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने और नदी किनारे अनावश्यक जोखिम से बचने की अपील की है।

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