रिपोर्ट: कबीर, मुजफ्फरनगर
साइबर पुलिस ने ठगी करने वाले गिरोह का किया पर्दाफाश
मुजफ्फरनगर में थाना साइबर क्राइम पुलिस ने नौकरी और लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से मोबाइल सिम कार्ड सक्रिय कराकर साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित करने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर सिम कार्ड प्राप्त करते थे और उन्हीं मोबाइल नंबरों के माध्यम से लोगों से संपर्क कर उन्हें नौकरी दिलाने या लोन स्वीकृत कराने का झांसा देकर पैसे ऐंठते थे। मामले में आगे की जांच जारी है।
गृह मंत्रालय के प्रतिबिंब पोर्टल से मिला अहम सुराग
साइबर पुलिस को इस गिरोह तक पहुंचने में गृह मंत्रालय के प्रतिबिंब (Pratibimb) पोर्टल से महत्वपूर्ण जानकारी मिली। पोर्टल पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान इन नंबरों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की।
तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची और उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की।
16 साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े मिले मोबाइल नंबर
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबरों के संबंध में देश के विभिन्न राज्यों से 16 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं। इन शिकायतों में लोगों को नौकरी, आसान लोन और वित्तीय सहायता का झांसा देकर धनराशि ठगने के आरोप शामिल हैं।
पुलिस अब इन सभी मामलों के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
पूछताछ में सामने आई फर्जी फाइनेंस कंपनियों की जानकारी
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित रूप से फर्जी फाइनेंस कंपनियों के नाम पर लोगों से संपर्क करने की बात स्वीकार की है। आरोप है कि वे खुद को किसी वित्तीय संस्था का प्रतिनिधि बताकर पहले लोगों का विश्वास जीतते थे और बाद में प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन शुल्क या अन्य मदों के नाम पर पैसे जमा कराते थे।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि पूछताछ से प्राप्त सभी जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।
मेरठ के दो आरोपी गिरफ्तार
साइबर पुलिस ने इस मामले में मेरठ निवासी शाजेब और वकील को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड तथा अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं।
जांच के दौरान फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खातों और ऑनलाइन भुगतान से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
पुलिस का मानना है कि इस कथित साइबर ठगी नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसी कारण पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी से प्राप्त धनराशि किन खातों में भेजी जाती थी और उसका उपयोग किस प्रकार किया जाता था।
साइबर क्राइम टीम डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग लेन-देन का विश्लेषण कर अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटी हुई है।
नागरिकों से सतर्क रहने की अपील
साइबर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि नौकरी, लोन या किसी भी वित्तीय सुविधा के नाम पर आने वाले अज्ञात फोन कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया विज्ञापनों पर बिना सत्यापन के विश्वास न करें। किसी भी प्रकार की राशि जमा करने से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचें।
यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो उसे तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष
मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस की इस कार्रवाई में नौकरी और लोन के नाम पर कथित साइबर ठगी करने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। जांच में विभिन्न राज्यों की साइबर शिकायतों से भी इस नेटवर्क के संभावित संबंध सामने आए हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों तथा ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है।
