रिपोर्टर: शुभम सिंह, बांदा
बांदा में बिजली संकट बना बड़ी परेशानी
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। जिले के जारी फीडर से जुड़े दो दर्जन के करीब गांवों में लंबे समय से बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लो-वोल्टेज, बार-बार होने वाली कटौती और खराब विद्युत लाइन के कारण आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। कई गांवों में लोगों को घंटों अंधेरे में रहना पड़ रहा है, जबकि किसान खेती-किसानी के महत्वपूर्ण समय में सिंचाई के लिए बिजली न मिलने से परेशान हैं।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द व्यवस्था सुधारने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
धान की रोपाई के समय किसानों की बढ़ी चिंता
इस समय क्षेत्र में धान की रोपाई का कार्य चल रहा है। ऐसे में खेतों की सिंचाई के लिए नियमित बिजली आपूर्ति बेहद जरूरी मानी जाती है। लेकिन किसानों का आरोप है कि निर्धारित समय पर बिजली नहीं मिल रही है। कई बार घंटों तक बिजली गुल रहती है और जब बिजली आती भी है तो वोल्टेज इतना कम होता है कि मोटर और पंप सही तरीके से नहीं चल पाते।
किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो फसलों की उत्पादकता पर असर पड़ सकता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खेती के मौसम को देखते हुए बिजली आपूर्ति में सुधार किया जाए।
गुरेह गांव में आठ दिनों से जली पड़ी बंच केबल
ग्रामीणों के अनुसार गुरेह गांव में पिछले आठ दिनों से बंच केबल जलने के कारण बिजली पूरी तरह बाधित है। इस वजह से करीब 50 से अधिक परिवारों के घरों में अंधेरा पसरा हुआ है। लोगों को पीने के पानी, मोबाइल चार्ज करने और अन्य आवश्यक घरेलू कार्यों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक केबल नहीं बदली गई। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारी समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय केवल आश्वासन देते रहे हैं।
अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समय पर कोई कार्रवाई नहीं होती। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों और लाइनमैनों के सीयूजी नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की जाती है, लेकिन अक्सर फोन नहीं उठाया जाता।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतों का समय पर निस्तारण हो तो लोगों को इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
डिजिटल सेवाओं पर भी पड़ा असर
बिजली संकट का असर केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है। लगातार बिजली बाधित रहने से ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल भुगतान, इंटरनेट सेवाएं और छोटे कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आज अधिकांश सरकारी और निजी सेवाएं डिजिटल माध्यम से संचालित होती हैं। ऐसे में लगातार बिजली बाधित रहने से बच्चों की पढ़ाई, ऑनलाइन काम और अन्य आवश्यक सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि गांवों में नियमित बिजली ही उपलब्ध नहीं होगी तो डिजिटल सुविधाओं का पूरा लाभ कैसे मिल पाएगा।
24 घंटे में समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और बिजली विभाग को 24 घंटे के भीतर समस्या के समाधान का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित समय में बिजली व्यवस्था सामान्य नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से प्रदर्शन करेंगे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन यदि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया तो वे चक्का जाम सहित लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने पर विचार करेंगे।
जनप्रतिनिधियों से भी हस्तक्षेप की अपील
स्थानीय लोगों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा हर नागरिक का अधिकार है और इस दिशा में सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि नियमित बिजली आपूर्ति से न केवल खेती बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और सामान्य जीवन भी सुचारु रूप से चल सकेगा।
विभाग से समाधान की उम्मीद
बिजली संकट को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। अब सभी की निगाहें बिजली विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जल्द समस्या का समाधान किया जाता है तो लोगों को राहत मिल सकती है। वहीं यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि खराब विद्युत लाइनों की मरम्मत, जली हुई केबल को बदलने और नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों और आम लोगों को राहत मिल सके।
