रिपोर्ट: जगनेश सोलंकी, बुलंदशहर
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के स्याना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान जहां वरिष्ठ अधिकारी फरियादियों की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने में व्यस्त थे, वहीं एक दरोगा सोते हुए नजर आए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे दरोगा की पहचान दरोगा विनोद के रूप में की जा रही है, जिनकी तैनाती थाना खानपुर में बताई जा रही है।
संपूर्ण समाधान दिवस में सोते हुए दिखे दरोगा
संपूर्ण समाधान दिवस का उद्देश्य आम जनता की शिकायतों को सुनना और उनका समयबद्ध समाधान करना होता है। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहते हैं ताकि लोगों की समस्याओं का मौके पर निस्तारण किया जा सके।
लेकिन स्याना में आयोजित समाधान दिवस के दौरान एक दरोगा के सोते हुए दिखाई देने का वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच नाराजगी देखने को मिल रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
कार्यक्रम के दौरान मौजूद किसी व्यक्ति ने दरोगा का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। प्रशासन की ओर से भी अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
लोगों ने उठाए सवाल
वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जब फरियादी अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर सरकारी कार्यक्रमों में पहुंचते हैं, तब जिम्मेदार अधिकारियों का इस तरह का रवैया प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों में अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी होती है ताकि आम नागरिकों का भरोसा बना रहे।
प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजर
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के बाद सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच में वीडियो सही पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासन की ओर से मामले की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
जवाबदेही और संवेदनशीलता की जरूरत
संपूर्ण समाधान दिवस जैसे कार्यक्रम जनता और प्रशासन के बीच सीधे संवाद का माध्यम होते हैं। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
यह घटना एक बार फिर सरकारी कार्यों में संवेदनशीलता, अनुशासन और जिम्मेदारी की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
