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106 साल पुराने ताम्रपत्र ने खोले इतिहास के पन्ने, बुढाना के जैन मंदिर में सहेजी गई विरासत

ब्यूरो : कबीर

उत्तर प्रदेश के Muzaffarnagar जनपद के बुढाना स्थित Shri 1008 Parshwanath Digambar Jain Mandir में संरक्षित लगभग 106 वर्ष पुराने ताम्रपत्र ने इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा के नए अध्याय खोल दिए हैं।

भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए “ज्ञान भारतम मिशन” के तहत इस ऐतिहासिक धरोहर का निरीक्षण किया गया, जिसके बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित किए जाने की दिशा में पहल तेज हो गई है।

ज्ञान भारतम मिशन के तहत हुआ निरीक्षण

शुक्रवार को जिलाधिकारी Umesh Mishra के निर्देशन एवं कण्डारकर कमल किशोर देशभूषण के मार्गदर्शन में समिति सदस्य डॉ. राजीव कुमार ने बुढाना स्थित जैन मंदिर पहुंचकर वहां संरक्षित दुर्लभ ताम्रपत्रों और प्राचीन दस्तावेजों का निरीक्षण किया।

इस दौरान मंदिर पदाधिकारियों को “ज्ञान भारतम मिशन” के उद्देश्य और महत्व की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

संवत 1976 का ताम्रपत्र बना आकर्षण का केंद्र

निरीक्षण के दौरान मंदिर में सुरक्षित संवत 1976 फाल्गुन बद्दी 5 का ताम्रपत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

विशेषज्ञों के अनुसार यह ताम्रपत्र लगभग 106 वर्ष पुराना है और भारतीय इतिहास, धार्मिक परंपरा तथा सामाजिक संरचना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी समेटे हुए है।

जैन समाज बुढाना के अध्यक्ष महेश जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने इस धरोहर से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

देशभर में चल रहा सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण

बताया गया कि “ज्ञान भारतम मिशन” के अंतर्गत देशभर में पांडुलिपियों, ताड़पत्रों, दुर्लभ ग्रंथों और प्राचीन अभिलेखों का सर्वेक्षण, सूचीकरण और डिजिटलीकरण किया जा रहा है।

इस मिशन के तहत सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों के साथ निजी संग्रहकर्ताओं को भी चिन्हित किया जा रहा है, ताकि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।

भारत के पास सबसे समृद्ध पांडुलिपि विरासत

विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया की सबसे समृद्ध पांडुलिपि विरासतों में शामिल देशों में से एक है।

देश में करीब एक करोड़ प्राचीन पांडुलिपियां मौजूद हैं, जिनमें दर्शन, आयुर्वेद, विज्ञान, साहित्य, गणित, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय संस्कृति से जुड़ा विशाल ज्ञान सुरक्षित है।

हालांकि समय के साथ इनमें से कई धरोहरें नष्ट होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं।

बजट 2025-26 में हुई मिशन की घोषणा

केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में “ज्ञान भारतम मिशन” की घोषणा की है।

इसे पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee द्वारा वर्ष 2003 में शुरू किए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन की परिकल्पना को नए स्वरूप में आगे बढ़ाने का प्रयास माना जा रहा है।

नई पीढ़ी तक पहुंचेगी विरासत

मिशन का उद्देश्य प्राचीन पांडुलिपियों और भारतीय ज्ञान परंपरा का संरक्षण, डिजिटलीकरण और वैश्विक स्तर पर प्रसार करना है।

आधुनिक तकनीकों के माध्यम से इस धरोहर को नई पीढ़ी, शोधकर्ताओं और इतिहासकारों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

अब राष्ट्रीय धरोहर बनने की ओर कदम

बुढाना के जैन मंदिर में सुरक्षित यह ताम्रपत्र अब केवल धार्मिक या ऐतिहासिक महत्व तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भारतीय सभ्यता और ज्ञान परंपरा की अमूल्य विरासत का प्रतीक बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की धरोहरों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास और संस्कृति को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

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