शाहजहांपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार को मानवता और संवेदनशील प्रशासन की एक मिसाल देखने को मिली, जब अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरविंद कुमार ने गंभीर रूप से घायल एक अनाथ बालक की मदद कर उसे नई उम्मीद दी। एडीएम की इस मानवीय पहल की जनपदभर में सराहना हो रही है।
जानकारी के अनुसार कुछ लोग 12 से 15 वर्ष की आयु के राहुल नामक बालक को ऑटो रिक्शा से कलेक्ट्रेट लेकर पहुंचे थे। बालक की स्थिति बेहद गंभीर थी और उसके एक पैर में गहरा जख्म था, जो समय पर उपचार न मिलने के कारण लगातार बिगड़ता जा रहा था।
इसी दौरान अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरविंद कुमार किसी शासकीय कार्य से बाहर जा रहे थे। उनकी नजर ऑटो रिक्शा में बैठे घायल बालक पर पड़ी। बच्चे की हालत देखकर उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और स्वयं उसके पास पहुंचकर उसकी स्थिति की जानकारी ली।
बातचीत में पता चला कि राहुल के माता-पिता नहीं हैं और उसका पालन-पोषण करने वाले संरक्षक आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं। संसाधनों के अभाव में वे बच्चे का समुचित उपचार नहीं करा पा रहे थे, जिसके कारण उसका घाव लगातार गंभीर होता जा रहा था। बच्चे की पीड़ा और परिजनों की बेबसी देखकर एडीएम वित्त भावुक हो उठे।
उन्होंने बिना देर किए तत्काल आवश्यक व्यवस्थाएं कराईं और बालक को उपचार के लिए एक निजी अस्पताल भिजवाया। साथ ही अस्पताल प्रबंधन से भी बात कर इलाज में किसी प्रकार की कमी न रहने के निर्देश दिए। एडीएम ने आश्वस्त किया कि राहुल के उपचार के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए उन्होंने बच्चे के साथ आई महिला को तत्काल आर्थिक सहायता भी प्रदान की, ताकि प्रारंभिक उपचार और अन्य आवश्यक जरूरतों में कोई बाधा न आए।
एडीएम वित्त अरविंद कुमार की इस संवेदनशील पहल की लोग सराहना कर रहे हैं। एक ओर जहां प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं, वहीं ऐसे अवसर यह साबित करते हैं कि संवेदनशीलता और मानवता ही प्रशासन की सबसे बड़ी ताकत है। राहुल के लिए यह मदद केवल इलाज की व्यवस्था नहीं, बल्कि एक नई उम्मीद और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
