अब नहीं पलायन, खेतों में लहलहा रही फसलें
सिंचाई का नया सहारा बनी ‘खेत तालाब योजना’, बुंदेलखंड के बांदा में लहलहाने लगीं फसलें
रिपोर्ट – शुभम सिंह
बांदा। कभी पानी की बूंद-बूंद को तरसने वाले बुंदेलखंड के बांदा जिले में अब ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के चलते अब बारिश का पानी बर्बाद होने के बजाय खेतों में बने तालाबों में जमा हो रहा है और इस संचित जल से किसान जरूरत के समय अपनी फसलों की सिंचाई कर पा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में अब तक 4800 से अधिक किसानों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। जिससे किसानोंत के चेहरों पर खुशहाली लौट आई है।
बांदा के मटौंध इलाके की तस्वीर इस बदलाव की जीती-जागती मिसाल है
कुछ साल पहले तक मटौंध क्षेत्र के किसान पूरी तरह मानसून और बारिश के भरोसे खेती करते थे। अगर बारिश ठीक हुई तो फसल बच जाती थी वरना लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था। गेहूं, धान, सरसों, चना और अरहर जैसी प्रमुख फसलों के लिए पानी की कमी एक स्थाई समस्या बनी हुई थी। हालात इतने बदतर हो चुके थे कि कई किसानों को कर्ज के दलदल से बचने के लिए खेती छोड़कर पलायन तक करने पर मजबूर होना पड़ा था।लेकिन खेत तालाब योजना ने इस निराशा को उम्मीद में बदल दिया है। इस योजना के तहत खेतों में तालाब खोदे जाते हैं जिससे बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर निकलने के बजाय वहीं रुक जाता है। संकट के समय यही पानी फसलों को नया जीवन देता है।
कृषि विभाग की तरफ से दिया जा रहा अनुदान
सिंचाई को और अधिक सुगम बनाने के लिए कृषि विभाग की ओर से पाइपलाइन और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सुविधाओं पर भी भारी अनुदान दिया जा रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि पहले खेती में भारी जोखिम था और कमाई का कोई भरोसा नहीं रहता था। कई बार तो लागत भी डूब जाती थी। लेकिन अब खेत में ही पानी का पक्का इंतजाम होने से वे पूरे भरोसे और आत्मविश्वास के साथ उन्नत खेती कर रहे हैं।
उप कृषि निदेशक डॉ. अभय राज सिंह ने बताया कि खेत तालाब योजना ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है और उन्हें सिंचाई के लिए पानी का अपना निजी स्रोत मिल गया है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष बांदा जिले में 255 नए किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके लिए चयन और निर्माण की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है।
