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बांदा में अवैध खनन के आरोपों से मचा हड़कंप, यमुना की जलधारा में मशीनों से खनन का दावा

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बांदा | संवाददाता – शुभम सिंह

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बबेरू क्षेत्र में यमुना नदी में कथित अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का दावा है कि मरकाखादर खंड संख्या-3 में एनजीटी (NGT) के नियमों की अनदेखी कर नदी की जलधारा के बीच भारी मशीनों से बालू निकाली जा रही है।

मामले को लेकर खनन विभाग, स्थानीय प्रशासन और कथित खनन संचालकों की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

यमुना की जलधारा में मशीनों से खनन का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि यमुना नदी की मुख्य जलधारा के बीच प्रतिबंधित भारी पोकलैंड मशीनें उतारकर खनन किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार का खनन न केवल एनजीटी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जलीय जीव-जंतुओं पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

“पहलवान ट्रेडर्स” पर लगे गंभीर आरोप

क्षेत्र में संचालित पहलवान ट्रेडर्स ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड पर अवैध खनन कराने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

ग्रामीणों और कुछ स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कंपनी द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बड़े पैमाने पर खनन कराया जा रहा है। हालांकि कंपनी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक संरक्षण के भी आरोप

मामले में कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अवैध खनन को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों और नेताओं के समर्थन के चलते प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो रही। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

“मीडिया और प्रशासन को मैनेज” करने का दावा

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि खदान संचालन से जुड़े लोगों द्वारा मीडिया और प्रशासन को प्रभावित करने की बातें कही जा रही हैं।

हालांकि इस तरह के दावों की पुष्टि आधिकारिक रूप से नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों के बीच इसे लेकर नाराजगी और चर्चा का माहौल बना हुआ है।

किसानों और पर्यावरण को नुकसान का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन के कारण यमुना किनारे की खेती प्रभावित हो रही है और नदी का स्वरूप बदलता जा रहा है।

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जलधारा के बीच मशीनों से खनन होने पर जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है और भविष्य में नदी कटान की समस्या भी बढ़ सकती है।

खनिज विभाग और प्रशासन पर सवाल

स्थानीय लोगों ने बांदा खनिज विभाग और बबेरू प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खुलेआम चल रहे कथित अवैध खनन के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

जनता पूछ रही जवाब

लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि एनजीटी नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो जिम्मेदार विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे।

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जांच और कार्रवाई की मांग तेज

स्थानीय लोगों, किसानों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि यमुना नदी में हो रहे कथित अवैध खनन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पर्यावरण, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

फिलहाल पूरे मामले को लेकर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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