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बाराबंकी में गमगीन माहौल में संपन्न हुआ मोहर्रम, यौमे आशूरा पर कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक की गईं ताजियाएं

रिपोर्टर: मोहम्मद नसीम

बाराबंकी। बाराबंकी जिले के सुबेहा कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मोहर्रम की दसवीं यानी यौमे आशूरा के अवसर पर श्रद्धा, आस्था और गमगीन माहौल के बीच ताजिया जुलूस निकाले गए। अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों की याद में मातम और नोहा-ख्वानी की। धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए विभिन्न स्थानों से निकली ताजियाओं को निर्धारित कर्बलाओं में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में शांति, सौहार्द और भाईचारे का वातावरण बना रहा।

नवई की रात दुआ और फातिहा का आयोजन

मोहर्रम की नवई के अवसर पर गुरुवार रात कस्बे के चौक पर ताजियाएं स्थापित की गईं। पूरी रात अकीदतमंदों ने दुआ और फातिहा का आयोजन किया तथा कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। देर रात तक लोग धार्मिक रस्मों में शामिल रहे और अमन-चैन की दुआएं मांगी गईं।

विभिन्न मोहल्लों से निकले ताजिया जुलूस

शुक्रवार को यौमे आशूरा के अवसर पर नगर पंचायत सुबेहा के सराय राजघाट, सुलेमानपुर, बादल पुरवा, किला दरवाजा, जवाहर नगर, बड़ी चौकी, छोटी चौकी सहित विभिन्न मोहल्लों से पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए। बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुलूस में शामिल हुए और मातम करते हुए कर्बला के शहीदों को याद किया।

किला दरवाजा से निकला मुख्य जुलूस नौवन चौराहे पर पहुंचा, जहां सभी स्थानों से आए ताजियादार एकत्र हुए। यहां पारंपरिक रूप से ताजियाओं का मिलान कराया गया। इसके बाद जुलूस निर्धारित सबील स्थल तक पहुंचा, जहां धार्मिक कार्यक्रम के औपचारिक समापन के बाद सभी ताजियाएं अलग-अलग कर्बलाओं में सुपुर्द-ए-खाक की गईं।

मातम और नोहा-ख्वानी से गूंजा माहौल

यौमे आशूरा के अवसर पर अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद करते हुए मातम किया और नोहा-ख्वानी की। श्रद्धालुओं ने कर्बला की कुर्बानी को इंसानियत, न्याय और सत्य की मिसाल बताते हुए उसे याद किया।

पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए लोगों ने अनुशासन और सौहार्द का परिचय दिया।

भीषण गर्मी में जगह-जगह लगीं सबीलें

भीषण गर्मी को देखते हुए कस्बे और जुलूस मार्ग पर विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय लोगों द्वारा जगह-जगह सबीलें लगाई गईं। इन सबीलों पर जुलूस में शामिल अकीदतमंदों और राहगीरों को शरबत, ठंडा पानी, खिचड़ा, बिस्कुट और कोल्ड ड्रिंक वितरित किए गए।

कई स्थानों पर लोगों ने ताजिया जुलूस का स्वागत भी किया और सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल देखने को मिली।

जनप्रतिनिधियों ने भी किया सेवा कार्य

नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि चौधरी अदनान हुसैन ने सबील पर पहुंचकर श्रद्धालुओं को शरबत वितरित किया। इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष देवीदीन रावत, चौधरी हुमायूं हुसैन सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

वहीं सभासद संघ अध्यक्ष रिजवान खान ने भी खिचड़ा वितरित कर जुलूस में शामिल लोगों की सेवा की। स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया और धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में अपनी भागीदारी निभाई।

सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

मोहर्रम के अवसर पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। जुलूस मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रभारी निरीक्षक बेचू सिंह (यदि आधिकारिक पदनाम यही है) सहित पुलिस अधिकारी लगातार पूरे आयोजन की निगरानी करते रहे।

पुलिस प्रशासन ने यातायात व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधों पर विशेष ध्यान दिया, जिससे कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

भाईचारे और सौहार्द का दिया संदेश

मोहर्रम का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का भी संदेश देता दिखाई दिया। प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

यौमे आशूरा के अवसर पर लोगों ने कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाज में अमन, शांति और इंसानियत कायम रहने की दुआ मांगी। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, अनुशासन और सौहार्द का वातावरण देखने को मिला।

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