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युवा संसद में गूंजा लोकतंत्र का स्वर, आपातकाल की सीख पर छात्रों ने रखे बेबाक विचार

रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। चौधरी छोटू राम पी.जी. कॉलेज में आयोजित “विकसित भारत युवा संसद 2026” कार्यक्रम में लोकतंत्र की मजबूती और आपातकाल की ऐतिहासिक सीखों पर युवाओं की आवाज बुलंद होती नजर आई। “आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के पश्चात लोकतंत्र के लिए सीख” विषय पर हुए इस भव्य आयोजन ने छात्रों के भीतर राजनीतिक समझ, तर्कशीलता और अभिव्यक्ति की क्षमता को मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि चौधरी योगराज सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सरस्वती वंदना और सरस्वती गान की प्रस्तुति ने माहौल को गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला युवा अधिकारी प्रतिभा शर्मा और एमएसयू एनएसएस समन्वयक डॉ. रामकुमार की उपस्थिति रही, जबकि अन्य गणमान्य अतिथियों में डॉ. अरुण कुमार, अमित कुमार, डॉ. केपी मालिक, डॉ. आरके सिंह और डॉ. गिरिराज किशोर शामिल रहे।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. के.पी. सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए युवाओं को लोकतंत्र की रीढ़ बताते हुए उनकी सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है और ऐसी गतिविधियां उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करती हैं। कार्यक्रम का संचालन जिला नोडल अधिकारी डॉ. हरिशंकर राठौर के निर्देशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
प्रतियोगिता में विभिन्न महाविद्यालयों से आए 15 प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे, जिनका मूल्यांकन निर्णायक मंडल—डॉ. माधुरी सिंह, डॉ. जगराज सिंह तोमर, डॉ. हरेंद्र सिंह सिरोही, डॉ. सुरेंद्र वीर सिंह और डॉ. अजीत पाल सिंह सिरोही—द्वारा किया गया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद छह प्रतिभागियों का चयन किया गया, जिनमें एसडी कॉलेज के अक्षय कुमार, चौधरी छोटू राम कॉलेज की अंजलि बालियान, श्री राम कॉलेज की इकरा, और चौधरी छोटू राम पीजी कॉलेज के हार्दिक रघुवंशी, अनुज अग्रवाल व शंकर शामिल रहे।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. ओमबीर सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि संचालन की जिम्मेदारी डॉ. निधि लूथरा ने बखूबी निभाई। पूरे आयोजन के दौरान छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। युवाओं ने लोकतंत्र के महत्व, आपातकाल के अनुभवों और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार रखकर यह साबित कर दिया कि नई पीढ़ी न केवल जागरूक है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक भविष्य को लेकर गंभीर भी है।

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