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जबरन जेंडर परिवर्तन व धर्मांतरण का आरोप, नाजिम बाजी बोलीं—“सभी आरोप मनगढ़ंत, साजिश के तहत फंसाया जा रहा है”

रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। अलमासपुर निवासी पलक (पूर्व नाम अविनाश), जो किन्नर समाज से जुड़ी हैं, ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना-पत्र देकर किन्नर नाजिम बाजी और उनके सहयोगियों पर जबरन जेंडर परिवर्तन, धर्मांतरण और अवैध उगाही जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पलक ने अपने पत्र में कहा है कि 2017 से पहले वह भजन-कीर्तन व जागरणों में नृत्य कर जीविका चला रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात किन्नर नाजिम बाजी से हुई, जिन्होंने आर्थिक प्रलोभन देकर उन्हें साथ चलने के लिए मजबूर किया। पलक का आरोप है कि दबाव में आकर वह उनके साथ चली गईं, जिसके बाद उन्हें दिल्ली ले जाकर जबरन जेंडर परिवर्तन की प्रक्रिया कराई गई।

पलक के अनुसार, जेंडर परिवर्तन के बाद उन्हें नाजिम बाजी के डेरे में रखा गया, जहां उन पर इस्लाम धर्म अपनाने, कलमा पढ़ने और नमाज़ अदा करने का दबाव बनाया गया, जबकि वह जन्म से सनातन धर्म से जुड़ी हैं। पलक ने आरोप लगाया कि डेरे में मौजूद मोहिनी उर्फ जावेद सहित कई लोग भी इस दबाव में शामिल थे। धार्मिक और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर वह राजस्थान चली गईं और बधाई गीतों के सहारे जीवन यापन करने लगीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नाजिम बाजी खुद को दबंग बताकर युवकों को फँसाने, जबरन जेंडर परिवर्तन कराने और अवैध उगाही का एक संगठित रैकेट चला रही हैं। पलक ने SSP से कठोर कार्रवाई, डेरे की जांच और नाजिम बाजी की संपत्तियों की जांच करवाने की मांग की है।

वही दूसरी ओर, नाजिम बाजी ने सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा, आधारहीन और मनगढ़ंत बताया है। उनका कहना है कि पलक नाम की व्यक्ति को वह जानती तक नहीं हैं और न ही कभी उनसे किसी तरह का कोई संपर्क रहा है। नाजिम बाजी का दावा है कि किन्नर समाज में कुछ लोग उनके बढ़ते प्रभाव से परेशान हैं और क्षेत्र पर कब्जा करने की साजिश के तहत पलक के माध्यम से झूठी कहानी गढ़कर उन्हें फँसाया जा रहा है।

नाजिम बाजी ने कहा कि वह वर्षों से समाज सेवा और पारंपरिक किन्नर प्रथाओं के तहत ही अपना जीवन यापन कर रही हैं। किसी प्रकार का जेंडर परिवर्तन कराने, धर्मांतरण करवाने या अवैध उगाही से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने SSP से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो पलक पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति झूठे आरोप लगाकर किसी की छवि खराब न कर सके।

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