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सियासी पारा हाई: “बीजेपी नहीं जीतेगी”, ममता दीदी का पलड़ा भारी — अब्दुल वाजिद अंसारी

रिपोर्ट – एकरार खान

गाजीपुर। जनपद के बहरियाबाद क्षेत्र में इन दिनों राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है। चुनावी सरगर्मियों के बीच अब्दुल वाजिद अंसारी ने एक बड़ा और चर्चा में आने वाला बयान देकर सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव अंसारी ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी इस बार चुनावी मैदान में जीत हासिल नहीं कर पाएगी और जनता उसका जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी है।
अंसारी ने खासतौर पर पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि वहां का चुनाव बंगाल अस्मिता के लिए लड़ा गया है, वहां का चुनाव मां,माटी और मानुष के लिए लड़ा गया है इसलिए बंगाल की जनता नहीं चाहती कि बंगाल की सत्ता को गैर बंगाली को सौंप दिया जाए ।जनता का रुझान पूरी तरह ममता बनर्जी के पक्ष में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “इस बार ममता दीदी का पलड़ा भारी है। जनता उनके कामकाज और संघर्ष को देखते हुए उन्हें फिर से मौका देने के मूड में है।” पश्चिम बंगाल के लोग बंगाल को हमेशा “अमार सोनार बांग्ला” की दृष्टिकोण से देखते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि बीते कुछ वर्षों में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर आम जनता के बीच असंतोष बढ़ा है, जिसका असर अब चुनाव में साफ दिखाई देगा। अंसारी का मानना है कि विपक्ष अब पहले से ज्यादा मजबूत और संगठित होकर मैदान में है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
अब्दुल वाजिद अंसारी ने कहा कि आने वाली 4 तारीख को जनता अपने मताधिकार का प्रयोग कर स्पष्ट संदेश देगी। “जनता वोट के जरिए बता देगी कि वह किसके साथ है। हमें पूरा विश्वास है कि ममता बनर्जी को भारी समर्थन मिलेगा और वह एक बार फिर जीत दर्ज करेंगी।” उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है और वही अंतिम फैसला सुनाती है।
अंसारी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर उनका असर नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों को लेकर आम जनता परेशान है और अब बदलाव चाहती है।
इस बयान के सामने आने के बाद गाजीपुर समेत पूरे पूर्वांचल में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय स्तर पर भी विभिन्न दलों के नेताओं के बीच बयानबाज़ी बढ़ गई है, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गर्म हो गया है।
फिलहाल सभी की निगाहें आने वाली 4 तारीख पर टिकी हैं, जब चुनाव परिणाम सामने आएंगे और यह साफ हो जाएगा कि जनता ने किसे अपना समर्थन दिया है। चुनावी नतीजे न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे देश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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