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सांसद नलिन सोरेन ने काटा पोखर पहुंचकर अमर शहीद आंदोलनकारियों को दी श्रद्धांजलि।

प्रभात मंत्र प्रतिनिधि/रानीश्वर

संथाल विद्रोह समापन के मार्मिक इतिहास से जुड़े तथ्यों से आमजनों को अवगत कराने के उद्देश्य से रविवार को गोटा भारत सिद्धों कान्हू हूल बैसी द्वारा दिगुली स्थित संथाल काटा पोखर परिसर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।अवसर पर दुमका लोकसभा सांसद नलिन सोरेन संघ जिप अध्यक्षा जोएस बेसरा काटा पोखर पहुंचकर संथाल काटा पोखर का परिदर्शन किया और अमर शहीद आंदोलनकारियों को याद करते उन्हें नमन किया और श्रद्धांजलि अर्पित की।गोटा भारोत सिदो कान्हू हूल बैसी दुमका ,भारत सेवा आश्रम ,पाथरा दुमका शाखा एवं बांग्ला भाषा व संस्कृति रक्षा समिति झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में रानीश्वर स्थित भारत सेवा आश्रम संघ पाथरा, से शाहिद स्थल संथाल काटा पोखर तक पदयात्रा का आयोजन किया गया।पदयात्रा में भारी संख्या में पदयात्री शामिल हुए, जिनका तिलाबानी गांव के कलाकारों द्वारा पारम्परिक संस्कृतिक तरीके से किया गया।पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य उन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है,जिन्होंने अपने हक एवं अधिकार के लिए तत्कालीन गवर्नर जेनरल कोलकाता के पास जा रहे थे, इसी क्रम में आमजोला घाट के पास अंग्रेज सिपाहियो द्वारा इन निहत्थे आंदोलनकारियो को बेरहमी से गोली और अन्य अस्त्रों से मार दिए गए और इनकी लाशों को काटा पोखर में फेंक दिया।यह घटना इतिहास के पन्नों पर न आने के कारण रहस्य ही रह गया।सरकारी दस्तावेजों से जानकारी हासिल कर बंगला भाषा व संस्कृति रक्षा समिति के सचिव एवं पत्रकार गौतम चैटर्जी द्वारा अपने लेखों में उजागर करने के कारण घटनाओं की जानकारी सामने आई।और जिसके बाद दुमका जिला के पूर्व उपायुक्त रविशंकर शुक्ला और मंत्री बसंत सोरेन की अगुवाई में इस स्थान का घेराबंदी कर एक पहचान दिया गया।1855 के संताल हूल वास्तव में आज की ही तिथि में आरंभ होने के कारण 7 जुलाई को इन अमर शहिदों को नमन करने के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजन की गई।ताकि प्रतिवर्ष इन शहिदों को इस तिथि को ही श्रद्धांजलि अर्पित की जा सके।कार्यक्रम में बैसी के सचिव इमानुएल सोरेन, सनातन मुर्मू, सुलेमान मरांडी, सच्चिदानंद सोरेन, फाo सोलोमन, डाo इनोसेंट सोरेन, शिवधान सोरेन,स्वामी नित्यवर्तानंद महाराज, पत्रकार गौतम चटर्जी, सिदो कान्हू बिरसा विश्वविद्यालय पुरुलिया से बेल टुडू एवं उनके साथी, बंगला भाषा व संस्कृति रक्षा समिति के पदाधिकारिगन उपस्थित थे।

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