रिपोर्ट – कबीर


मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में वर्ष 2013 में गन्ना भुगतान को लेकर हुए किसान आंदोलन से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए भारतीय किसान यूनियन से जुड़े 22 आंदोलनकारियों को दोषमुक्त कर दिया। करीब 13 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद एफटीसी कोर्ट ने साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
दरअसल वर्ष 2013 में मंसूरपुर शुगर मिल पर गन्ना भुगतान न होने से नाराज भारतीय किसान यूनियन के नेताओं और किसानों ने जोरदार आंदोलन किया था। आंदोलन के दौरान किसानों ने प्रदर्शन करते हुए नेशनल हाईवे-58 पर जाम लगाया और रेल यातायात बाधित करने का आरोप भी लगा था। उस समय क्षेत्र में धारा 144 लागू होने के बावजूद प्रदर्शन किए जाने को लेकर थाना मंसूरपुर पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में कुल 62 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
मामला अदालत में लंबे समय तक विचाराधीन रहा और आरोपियों को लगातार अदालत में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्रवण कुमार एडवोकेट ने बताया कि मुकदमे के दौरान 62 आरोपियों में से 22 की पत्रावली अलग कर दी गई थी। इन सभी आरोपियों ने लगातार अदालत में हाजिरी लगाई और करीब 13 साल तक चली इस कानूनी लड़ाई में किसानों को लगभग 500 से अधिक तारीखों का सामना करना पड़ा।
एफटीसी कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर निर्णय सुनाया और सभी 22 आरोपियों को गुण-दोष के आधार पर बरी कर दिया। फैसले के बाद किसानों और उनके समर्थकों में राहत और संतोष का माहौल देखा गया।
दूधाहेड़ी के ग्राम प्रधान व भाकियू नेता अशोक राठी ने बताया कि 2013 में थाना मंसूरपुर में चंद्रपाल फौजी आदि के नाम से यह मुकदमा दर्ज हुआ था। कुल 62 लोगों में से 22 की फाइल अलग कर दी गई थी, जिनके पक्ष में अदालत का फैसला आया है। उन्होंने बताया कि अभी 40 अन्य आरोपियों का मामला अदालत में विचाराधीन है। कोर्ट ने हम सभी 22 लोगों को निर्दोष मानते हुए इस मुकदमे से बरी कर दिया है।
मुकदमे में बरी होने वालों में अशोक राठी (प्रधान दूधाहेड़ी), मोनू कुमार, जय कुमार, राजवीर, अनिल, पुष्पेंद्र, पप्पू, दुष्यंत त्यागी, जोगेंद्र, सुशील, पप्पन, अमित राठी, ब्रह्मपाल, चरण सिंह, गोपाल, हरबीर, सुशील, राजा, प्रदीप, योगेंद्र, सत्य वृतांत और रमेश शामिल हैं।
करीब 13 साल बाद आए इस फैसले को किसान नेताओं ने बड़ी राहत बताते हुए न्याय की जीत करार दिया
