रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। आबकारी मोहल्ला निवासी युवक सोनू उर्फ सोनू कश्यप की निर्मम हत्या के बाद जनपद का माहौल लगातार उबलता जा रहा है। इस सनसनीखेज हत्याकांड ने अब सियासत और कानून-व्यवस्था को आमने-सामने ला खड़ा किया है। आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद को उस वक्त पुलिस ने रोक लिया, जब वे पीड़ित परिवार से मुलाकात के लिए जा रहे थे। भोपा पुल के पास नवीन पेट्रोल पंप के नज़दीक ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाकर सांसद का काफिला रोक दिया गया, जिससे कुछ देर के लिए हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए और क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार सोनू उर्फ सोनू कश्यप की मेरठ के ज्वालागढ़ गांव में पेट्रोल डालकर जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य वारदात के बाद से मृतक के परिजन और स्थानीय लोग लगातार इंसाफ की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, फांसी की सजा और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग को लेकर बीते दिनों कलेक्ट्रेट परिसर में भी जोरदार प्रदर्शन हुआ था, जिससे प्रशासन पर दबाव साफ तौर पर बढ़ता दिखाई दिया।
इसी क्रम में सांसद चंद्रशेखर आज़ाद मुज़फ्फरनगर पहुंचे और पीड़ित परिवार से सीधे मिलकर उन्हें न्याय का भरोसा दिलाने के लिए रवाना हुए। लेकिन जैसे ही उनका काफिला शहर की सीमा में दाखिल हुआ, थाना सिविल लाइन पुलिस ने “सुरक्षा कारणों” का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। मौके पर सीओ सिटी सिद्धार्थ मिश्रा, सीओ नई मंडी राजू कुमार साव, सीओ जानसठ रुपाली राव, थाना सिविल लाइन प्रभारी आशुतोष कुमार सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा।
सांसद को रोके जाने की सूचना फैलते ही समर्थकों और स्थानीय लोगों में आक्रोश भड़क उठा। भोपा पुल क्षेत्र में कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। समर्थकों ने प्रशासन पर पीड़ित परिवार की आवाज दबाने का आरोप लगाया, जबकि पुलिस अधिकारियों का कहना रहा कि स्थिति संवेदनशील होने के कारण यह कदम उठाया गया।
मीडिया से बातचीत में चंद्रशेखर आज़ाद ने प्रशासन और सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खुलेआम गुंडाराज चल रहा है और गरीब, वंचित व शोषितों से मिलने जाने वालों को रोका जा रहा है। “जब एक जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार से नहीं मिल सकता, तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा?” उन्होंने सवाल खड़ा किया। सांसद ने बताया कि उन्होंने पीड़ित परिवार से फोन पर बात की है, लेकिन प्रशासन उन्हें मिलने नहीं दे रहा। उन्होंने इसे लोकतंत्र का “चीरहरण” करार दिया और कहा कि वे पीड़ित परिवार से महज एक किलोमीटर की दूरी पर खड़े हैं, फिर भी मिलने से रोका जा रहा है।
चंद्रशेखर आज़ाद ने हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और घटना से प्रभावित बच्चे के परिवार को एक सरकारी नौकरी मिले। उन्होंने मेरठ और मुज़फ्फरनगर दोनों मामलों का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह प्रशासन का रवैया रहा है, उससे साफ लगता है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की राह आसान नहीं है।
सांसद ने ऐलान किया कि न्याय न मिलने की स्थिति में वे पीड़ित, शोषित और वंचितों के साथ मिलकर महापंचायत करेंगे, चाहे वह मेरठ में हो या मुज़फ्फरनगर में। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार के पास दो ही रास्ते हैं—या तो उन्हें गोली मार दे या फिर पीड़ित परिवारों से मिलने से रोके नहीं। “मैं रात में जाऊं या दिन में, बाइक से जाऊं या ऑटो से—पीड़ित परिवार से मिलकर ही जाऊंगा,” उन्होंने कहा। मुख्यमंत्री से अपील करते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि या तो न्याय को खत्म कर दिया जाए या फिर उन्हें ही, लेकिन जब तक वे जिंदा हैं, न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।
फिलहाल पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में चंद्रशेखर आज़ाद मुज़फ्फरनगर से रवाना हो गए हैं। अब जिले की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या वे दोबारा लौटकर पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पाते हैं और प्रशासन आगे इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है। सोनू हत्याकांड ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और न्याय की कसौटी पर सिस्टम को खड़ा कर दिया है।
