ज़हरीले धुएं में घुटता मखियाली, पेपर मिल के खिलाफ ग्रामीणों का विस्फोट

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कैंसर, अपंग बच्चे और बांझपन का दंश झेल रहे ग्रामीण, डीएम से दो टूक मांग—कचरा जलाना बंद हो या हमें बसाया जाए कहीं और

रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ़्फ़रनगर। भोपा रोड स्थित पेपर मिल व अन्य औद्योगिक इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे भीषण प्रदूषण ने ग्राम मखियाली को मौत के साए में धकेल दिया है। वर्षों से जहरीले धुएं और दूषित पानी के बीच जी रहे ग्रामीणों का सब्र अब टूट चुका है। दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर एक स्वर में गुहार लगाई कि फैक्ट्रियों में ईंधन के नाम पर नगर पालिका का कचरा और एमएसडब्ल्यू आरडीएफ जलाया जाना तुरंत बंद कराया जाए, अन्यथा उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाने की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि कानून को ताक पर रखकर औद्योगिक इकाइयों में नगर पालिका का कचरा जलाया जा रहा है, जिससे वायु और जल प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। इसके दुष्परिणाम अब सीधे इंसानी जिंदगियों पर नजर आ रहे हैं। गांव में कैंसर, सांस व फेफड़ों की गंभीर बीमारियां, काला पीलिया, आंखों और त्वचा से जुड़ी रोग लगातार बढ़ रहे हैं। हालात इतने भयावह हैं कि कई ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि प्रदूषण की मार सबसे ज्यादा बच्चों और महिलाओं पर पड़ रही है। गांव में अपंग बच्चों का जन्म हो रहा है, महिलाएं बांझपन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही हैं और शायद ही कोई परिवार ऐसा बचा हो, जहां कोई न कोई सदस्य गंभीर बीमारी से ग्रस्त न हो। ग्रामीणों ने कहा कि अब गांव में सांस लेना भी किसी सजा से कम नहीं रह गया है।
ग्रामीणों का गुस्सा इस बात को लेकर भी फूटा कि इतने गंभीर हालात के बावजूद संबंधित विभागों और अधिकारियों ने अब तक आंखें मूंद रखी हैं। न प्रदूषण पर रोक लगी, न दोषी औद्योगिक इकाइयों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि आरडीएफ के नाम पर नगर पालिका का कचरा लाने और जलाने की प्रक्रिया पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वे सड़क से लेकर प्रशासनिक कार्यालयों तक बड़ा जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे। मखियाली के लोग अब सिर्फ न्याय नहीं, जीने का हक मांग रहे हैं।

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