रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खाप परंपरा और सामाजिक एकता की मिसाल माने जाने वाले ऐतिहासिक गांव सोरम में चल रही तीन दिवसीय सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत में सोमवार को जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र कुमार चौधरी विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे।
विस्तृत मैदान में दूर-दूर तक फैली भीड़, पारंपरिक सरदारी की उपस्थिति और अलग-अलग खापों के झंडे देखकर उपमुख्यमंत्री visibly भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि सोरम की यह सभा सिर्फ पंचायत नहीं, बल्कि भारतीय एकता और सामाजिक जागरूकता का महाकुंभ है।
“यह महापंचायत किसी एक बिरादरी नहीं, पूरे भारत का आईना” — डिप्टी सीएम
सुरेंद्र चौधरी ने मंच से समाज सुधार की दिशा में कड़े, प्रभावी और समयानुकूल निर्णय लेने की अपील की।
उन्होंने कहा—
“जो महात्मा गांधी ने भारत की विविधता में एकता का सपना देखा था, वह आज सोरम की इस धरती पर साकार दिखाई दे रहा है। यहां बैठे लोग अपनी जाति, धर्म, मजहब और राजनीतिक पहचान को किनारे रखकर एक छत के नीचे आए हैं। यही भारत की असली ताकत है।”
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता और वहां का प्रशासन खापों के निर्णयों का सम्मान करता आया है और आगे भी करेगा।
जम्मू-कश्मीर पर बोले डिप्टी सीएम — ‘हकीकत TRP से अलग है’
डिप्टी सीएम ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर की शांति और व्यवस्था पर उठाए जाने वाले सवालों पर भी करारा जवाब दिया।
उन्होंने कहा—
“कुछ पत्रकार जम्मू-कश्मीर को नेशनल आउट की तरह दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि वहां की स्थिति आज उतनी ही शांत और सामान्य है जितनी यूपी, दिल्ली और हरियाणा में।”
उन्होंने बताया कि अब जम्मू-कश्मीर का ऐतिहासिक ‘दरबार मूव’ पूरी पारदर्शिता और सहजता से श्रीनगर में संचालित हो रहा है।
“पाकिस्तान की छिटपुट हरकतें किसी प्रदेश की असल तस्वीर नहीं बदल सकतीं। जम्मू-कश्मीर आज विकास, शांति और स्थिरता की राह पर आगे बढ़ रहा है।”
राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल बोले — ‘यहां किए गए फैसले समाज की दिशा तय करेंगे’
पंचायत में मौजूद उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि सर्वखाप पंचायत का यह आयोजन अपने आप में मिसाल है।
उन्होंने कहा—
“समाज में फैली कुरीतियों को रोकने के लिए यहां बेहद अहम और ठोस निर्णय लिए जाएंगे। खापों की एकजुटता समाज को नई दिशा देती है।”
सोरम के विशाल चौक में जुटी लाखों की भीड़, गांव-गांव से आए खाप प्रतिनिधि, पारंपरिक सरदारी और मंच से उठती समाज सुधार की आवाज़ ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
