ब्यूरो: कबीर
मुजफ्फरनगर। बदलते पर्यावरणीय संकट और घटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच अब किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी नई पहल शुरू हो गई है। कृषि विभाग उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अनुमोदित तथा Indian Institute of Technology Roorkee के मार्गदर्शन में संचालित “किसान समृद्धि कार्बन क्रेडिट योजना” को लेकर बुधवार को उप कृषि निदेशक कार्यालय परिसर में किसान संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर योजना की जानकारी हासिल की।उप कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही ने कहा कि कार्बन क्रेडिट योजना आने वाले समय में किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बड़ा माध्यम बन सकती है। उन्होंने बताया कि जो किसान जैविक खेती, वृक्षारोपण, सौर ऊर्जा उपयोग और कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली तकनीकों को अपनाएंगे, उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार कार्बन क्रेडिट दिए जाएंगे। इन क्रेडिट्स का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापार कर किसान आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे।कार्यक्रम में मौजूद A. S. Maurya ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए कृषि क्षेत्र में हरित तकनीकों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस योजना से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, हरित आवरण बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में भी इजाफा होगा। इसके साथ ही किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण शिविर और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए आधुनिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।अधिकारियों ने बताया कि यह योजना “हरित भारत” की अवधारणा को मजबूत करेगी और पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास का नया मॉडल प्रस्तुत करेगी। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के अध्यक्ष डॉ. हंसराज, जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया, डॉ. आलोक पांडे, डॉ. एकता मिश्रा, आशीष जायसवाल, संजय कोमेरा, मितु, सचिन कुमार, रवि पुंडीर समेत करीब 90 किसान मौजूद रहे।
