राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उठी मांग श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर रोज़ लगे माखन-मिश्री का भोग,

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रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर देश की सियासत और धार्मिक माहौल एक बार फिर गर्माने लगा है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास ने अब सीधे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर बड़ा हस्तक्षेप करने की मांग कर दी है। पत्र में जहां मंदिर परंपराओं के पालन की बात कही गई है, वहीं इस मुद्दे को आस्था और इतिहास से जोड़ते हुए आंदोलन को और तेज़ करने के संकेत भी दिए गए हैं।

मुजफ्फरनगर में मीडिया सेंटर पर प्रवेश वार्ता में जानकारी देते हुए बताया है अखिल भारत हिंदू महासभा के
राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सिद्धार्थ भट्टाचार्य और प्रदेश अध्यक्ष योगेंद्र वर्मा ने संयुक्त रूप से राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में मांग की है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में प्रतिदिन भगवान श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री का भोग लगाया जाए।

पत्र में दावा किया गया है कि वर्ष 1670 में मुगल शासक औरंगज़ेब द्वारा मंदिर ध्वस्त कर शाही ईदगाह का निर्माण कराया गया था, जिसके चलते वर्षों से भगवान श्रीकृष्ण को नियमित भोग नहीं लगाया जा सका। इसी को आधार बनाते हुए न्यास ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
सबसे अहम बात यह है कि न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज पिछले चार वर्षों से अन्न त्याग कर केवल फलाहार पर हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि जब तक भगवान श्रीकृष्ण को नियमित भोग नहीं लगेगा, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। इस तपस्या को भी पत्र में प्रमुखता से उल्लेखित किया गया है।

राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में आवश्यक निर्देश जारी करें, ताकि मंदिर में पूजा-पद्धति बिना किसी बाधा के संचालित हो सके और श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान बना रहे।
इस पत्र के सामने आने के बाद एक बार फिर मथुरा का यह संवेदनशील मुद्दा चर्चा में आ गया है। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज़ होने की संभावना जताई जा रही है।
इसी बीच इस पूरे प्रकरण में दिनेश फलाहारी महाराज का एक और बड़ा बयान सामने आया है, जिसने इस आंदोलन को और धार दे दी है। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक कृष्ण जन्मभूमि पर भोग नहीं लगाया जाएगा, तब तक उनका यह त्याग लगातार जारी रहेगा और वे नंगे पांव ही जन-जन तक अपनी बात पहुंचाते रहेंगे।

साथ ही राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह केवल एक मांग नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द इस दिशा में निर्णय लिया जाए

दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से राष्ट्रपति से भावुक अपील करते हुए कहा कि राष्ट्रपति इस मामले में हस्तक्षेप करें और उन्हें भी भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाने की अनुमति दिलाई जाए, ताकि उनकी तपस्या पूर्ण हो सके और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को सम्मान मिल सके।

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