रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। मुज़फ़्फ़रनगर के शिया समुदाय ने इस बार ईद का त्योहार खुशियों के बजाय सादगी और शोक के साथ मनाने का फैसला किया है। मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और धर्मगुरु मौलाना असद के निधन को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
मौलाना असद ने बताया कि ईद अल्लाह का हुक्म है, इसलिए नमाज पहले की तरह अदा की जाएगी, लेकिन त्योहार मनाने के तरीके में बदलाव किया जाएगा। इस बार लोग नए कपड़े पहनने के बजाय पुराने या सादे लिबास पहनकर मस्जिद पहुंचेंगे।
नमाज के बाद गले मिलने, मिठाई बांटने और घर-घर जाकर मुबारकबाद देने से परहेज किया जाएगा। खरीदारी और सजावट जैसे आयोजनों से परहेज का संदेश दिया गया है ताकि युद्ध पीड़ितों और मजलूमों के दर्द को महसूस किया जा सके।
धर्मगुरु ने कहा कि यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच नहीं है, बल्कि हक और नाइंसाफी के बीच टकराव है। उन्होंने पूरे समुदाय और दुनिया भर के मुसलमानों से अपील की कि वे अपनी खुशियों को सीमित कर युद्ध पीड़ितों के साथ खड़े रहें।
ईद की नमाज के दौरान विशेष रूप से भारत की आंतरिक सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द और सरहदों पर तैनात सैनिकों की सलामती के लिए दुआ की जाएगी। स्थानीय बाजारों में हलचल कम है और लोग सादगी और इबादत में समय बिताने की तैयारी कर रहे हैं।

