रिपोर्ट – अनिल कुमार

फतेहपुर। अभयपुर मुस्तकिल में जमीन धोखाधड़ी के मामले में थाना औंग में एफआईआर तो दर्ज कर ली गई, लेकिन पुलिस की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। पीड़िता रीना वर्मा ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में साफ-साफ विक्रेता, लेखपाल और ब्रोकर के नाम लिखित रूप से दर्ज कराए थे, इसके बावजूद एफआईआर में ब्रोकर और लेखपाल को “नाम अज्ञात” दिखा दिया गया।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि गाटा संख्या 78/2, खाता संख्या 00569 की 0.0160 हेक्टेयर भूमि को दोबारा दिखाकर 06 अगस्त 2025 को बैनामा कराया गया, जबकि वही गाटा पहले से किसी अन्य के नाम दर्ज था। इस पूरे खेल में विक्रेता भगवानदीन, उसके पुत्र, ब्रोकर सुनील निषाद व संदीप तिवारी और क्षेत्रीय लेखपाल शुभम सिंह की मिलीभगत बताई गई है।
रीना वर्मा के पति का कहना है कि बिना लेखपाल की रिपोर्ट के न तो गलत गाटा दिखाया जा सकता है और न ही बैनामा संभव है। बावजूद इसके लेखपाल का नाम एफआईआर से गायब कर दिया गया, जिससे कार्रवाई को कमजोर करने की आशंका गहरा गई है।
पीड़िता ने बताया कि 16.50 लाख रुपये का भुगतान बैंक खातों के माध्यम से किया गया, फिर भी धोखे का शिकार होना पड़ा। अब सवाल यह है कि क्या एफआईआर में नामजद आरोपियों को बचाने की कोशिश हो रही है, या पुलिस निष्पक्ष जांच कर सच सामने लाएगी। जनता की निगाहें अब उच्चाधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।
