धरने पर उतरीं महिलाएं, प्रधान शोएब पर विकास कार्य सिर्फ काग़ज़ों तक सीमित होने के आरोप
रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ़्फ़रनगर। बुढ़ाना तहसील क्षेत्र के सफीपुर पट्टी बुढ़ाना देहात में जल निकासी की भयावह समस्या ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सड़क पर बह रहा है, जिससे पूरी सड़क तालाब में तब्दील हो चुकी है। हालात इतने बदतर हैं कि पैदल चलना दूभर हो गया है और राहगीरों के कपड़े गंदे पानी के छींटों से खराब हो रहे हैं। इसी गंभीर समस्या के विरोध में ग्रामीणों और महिलाओं ने एक बार फिर धरना प्रदर्शन कर प्रशासन और ग्राम प्रधान के खिलाफ आक्रोश जताया।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर जमा दूषित पानी संक्रमण और बीमारियों को खुला न्योता दे रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। बदबू और गंदगी के कारण बस्ती में रहना मुश्किल हो गया है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदारों की नींद नहीं खुल रही।
धरना प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान शोएब के खिलाफ तीखी नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों का आरोप है कि यह उनका दूसरा धरना है, इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे पहले भी ग्रामीण उपजिलाधिकारी बुढ़ाना को प्रार्थना पत्र सौंप चुके हैं, जिसमें बस्ती से नदी तक लगभग 60 मीटर लंबे नाले के निर्माण की मांग की गई थी, ताकि बस्ती का गंदा पानी सीधे नदी में निकल सके और सड़क को राहत मिल सके।
धरने की सूचना पर विजय हिंदुस्तानी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की पीड़ा सुनी। इसके बाद एसडीएम बुढ़ाना अपूर्वा यादव ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विकास खंड अधिकारी सतीश कुमार को मौके पर भेजा। बीडीओ ने हालात का जायजा लेने के बाद ग्रामीणों को दो दिन के भीतर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना अस्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया।
हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं होता। सफीपुर पट्टी ही नहीं, बल्कि सफीपुर गांव में भी ग्राम प्रधान शोएब पर विकास कार्य न कराने के आरोप लगातार लगते रहे हैं। हाल ही में सफीपुर गांव के ग्रामीणों ने भी प्रधान के खिलाफ जबरदस्त धरना प्रदर्शन किया था। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि बार-बार शिकायतों और धरनों के बावजूद प्रधान के खिलाफ अब तक कोई ठोस जांच कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या गांव का विकास सिर्फ फाइलों और काग़ज़ों तक ही सीमित रह गया है?
वहीं दूसरी ओर, प्रधान शोएब का कहना है कि उनके पास इस समस्या को लेकर कोई नहीं आया। उनका तर्क है कि जब तक कोई शिकायत लेकर नहीं आएगा, काम कैसे कराया जाएगा, और धरना प्रदर्शन तो आजकल रोज़ ही होते रहते हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन के आश्वासन के बाद वास्तव में नाला निर्माण और जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान होता है या फिर ग्रामीणों को एक बार फिर धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना।
