रिपोर्ट – एकरार खान

गाजीपुर। सिंचाई विभाग में तैनात सेटलमेंट बाबू की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, वर्षों से जमे इस सेटलमेंट बाबू पर विभाग को अंदर ही अंदर खोखला करने के आरोप हैं। हाल ही में ‘भागवत टाईम्स’ में इस संबंध में खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि खबर प्रकाशित होते ही जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों में खलबली देखी गई। आरोप है कि सेटलमेंट बाबू ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर विभागीय अभिलेखों में हेरफेर की, जिससे डिवीजन की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। सूत्रों की मानें तो लाखों रुपये के गोलमाल के बावजूद अब तक जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
आउटसोर्सिंग के नाम पर बंदरबांट का आरोप
मामले में यह भी आरोप सामने आए हैं कि आउटसोर्सिंग कर्मियों के नाम पर जारी धनराशि का सही उपयोग नहीं हुआ। कागजों में भुगतान दर्शाकर वास्तविक लाभार्थियों तक राशि न पहुंचने की बातें कही जा रही हैं। इससे न केवल विभागीय छवि धूमिल हुई है, बल्कि शासन की योजनाओं पर भी सवाल उठे हैं।
जांच की उठी मांग
स्थानीय लोगों और विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।
अब देखना यह है कि खबर सामने आने के बाद शासन-प्रशासन इस पूरे प्रकरण में क्या कदम उठाता है और क्या विभाग को कथित ‘दीमक’ से निजात मिल पाती है या नहीं।
