बाराबंकी शहर कोतवाल रहने के दौरान धनोखर चौराहे पर व्यापारियों को लाउडस्पीकर से गालियां देने के मामले में हुई थी किरकिरी
रिपोर्ट – संदीप वर्मा
बाराबंकी। कानून के रखवाले ही अदालत के बार-बार बुलाने
पर गवाही देने न पहुंचें तो न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठना
जरुरी है। बाराबंकी में बच्चे से दुष्कर्म के एक मुकदमे में लगातार करीब ढाई साल से गवाही के लिए पेश न होने पर अयोध्या कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक पंकज सिंह के खिलाफ अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।
अपर सत्र न्यायाधीश एवं पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश
ज्ञान प्रकाश शुक्ला ने उनके खिलाफ प्रकीर्णवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर इंस्पेक्टर के रवैये से अवगत कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने चार नवंबर को गवाही के लिए अंतिम मौका दिया है।
बता दे कि बाराबंकी शहर कोतवाल रहने के दौरान धनोखर चौराहे पर व्यापारियों को लाउडस्पीकर से गालियां देने के मामले में हुई थी किरकिरी, उसके बाद तबादला अन्य थाने हो गया था।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, वर्ष 2022 में मसौली थाना क्षेत्र में एक बच्चे से दुष्कर्म के मामले में इमामुद्दीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और वह मौजूदा समय में जेल में बंद है।
घटना के समय पंकज सिंह मसौली थाने के प्रभारी निरीक्षक थे। इस कारण मुकदमे में उनकी गवाही महत्वपूर्ण है।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से पंकज सिंह को कई तारीखों पर गवाही के लिए तलब किया गया, लेकिन वह पेश नहीं हुए। बृहस्पतिवार को भी उनके गवाही देने नहीं पहुंचने पर अदालत ने नाराजगी जताई और मामले में कड़ा आदेश जारी किया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पिछली पेशी पर गवाही के लिए अंतिम अवसर दिया गया था। इसके बावजूद संबंधित पुलिस अधिकारी का अदालत में उपस्थित न होना न्यायिक प्रक्रिया में असहयोग और बाधा डालने की पराकाष्ठा है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि पहले ही वेतन रोकने की कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी गवाही के लिए
उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हुई।
अदालत ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए पंकज सिंह के खिलाफ प्रकीर्णवाद दर्ज करने और पुलिस महानिदेशक को
पत्र भेजने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस रुख से स्पष्ट है कि
न्यायिक कार्यवाही में लापरवाही को सामान्य चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
चार नवंबर को आखिरी मौका, फिर बढ़ सकती हैं मुश्किलें…
विशेष न्यायाधीश ने पंकज सिंह को चार नवंबर को गवाही के
लिए उपस्थित होने का अंतिम अवसर दिया है। आदेश में
चेतावनी दी गई है कि इस तारीख पर भी उनके उपस्थित न
होने की स्थिति में अभियोजन, पुलिस और प्रशासन की
जिम्मेदारी तय होने का सवाल उठेगा।
बच्चे से दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में मुकदमे की सुनवाई के
दौरान महत्वपूर्ण गवाह का लंबे समय तक पेश न होना न्यायिक प्रक्रिया की गति पर भी असर डाल सकता है। अब सबकी निगाहें चार नवंबर की पेशी पर टिकी हैं कि संबंधित
इंस्पेक्टर अदालत में उपस्थित होकर गवाही देते हैं या उनकी
गैरहाजिरी पर आगे और सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
