Homeउत्तर प्रदेशमस्जिद में सादगी से निकाह, न दहेज न दिखावा; पांचों बच्चों की...

मस्जिद में सादगी से निकाह, न दहेज न दिखावा; पांचों बच्चों की शादी बिना दान-दहेज की

रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। महंगी शादियों और दहेज के बढ़ते चलन के बीच मुजफ्फरनगर में हुआ एक सादगी भरा निकाह समाज के लिए मिसाल बन गया। गाजियाबाद के फरीदनगर से आई बारात में मुजम्मिल का निकाह जनकपुरी कच्ची सड़क निवासी शबाना के साथ मस्जिद में सादगी से हुआ। खास बात यह रही कि शादी में न दान-दहेज की मांग हुई और न ही दिखावे व फिजूलखर्ची पर रकम खर्च की गई।

05 अक्टूबर को फरीदनगर निवासी मोहम्मद यामीन के पुत्र मुजम्मिल की बारात मुजफ्फरनगर पहुंची। यहां ताहिर अली की पुत्री शबाना के साथ निकाह कराया गया। दोनों परिवारों ने शादी को आसान और सादगीपूर्ण रखने का फैसला किया। मस्जिद में निकाह की रस्म पूरी हुई और बिना किसी तामझाम के दोनों परिवारों ने नए रिश्ते की शुरुआत की।

पांचों बच्चों का निकाह बिना दहेज किया

मुजम्मिल के पिता मोहम्मद यामीन ने कहा कि उन्होंने अपने सभी पांच बच्चों का निकाह बिना किसी दान-दहेज के किया है। उनका कहना है कि निकाह को आसान बनाया जाना चाहिए और दहेज जैसी परंपरा को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। इससे गरीब परिवारों पर बेटी की शादी का आर्थिक बोझ कम होगा और बेटियों की शादी आसानी से हो सकेगी।

दिखावे की होड़ के बीच सादगी बनी मिसाल

आज शादियों में बड़े आयोजन, महंगे इंतजाम और दहेज का दबाव कई परिवारों के लिए परेशानी का कारण बनता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेटी की शादी के लिए लंबे समय तक तैयारी और खर्च की चिंता करनी पड़ती है। ऐसे समय में मुजम्मिल और शबाना का सादगी भरा निकाह यह संदेश देता है कि शादी को बोझ बनाने के बजाय आसान बनाया जा सकता है।

दोनों परिवारों ने बिना अनावश्यक खर्च और दहेज के निकाह कर यह संदेश दिया कि वैवाहिक रिश्ते की मजबूती दिखावे और खर्च से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, विश्वास और जिम्मेदारी से तय होती है। यह निकाह उन परिवारों के लिए भी उम्मीद की मिसाल है, जो दहेज और महंगी शादी की परंपराओं के कारण बेटियों के विवाह को लेकर चिंतित रहते हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments