रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना क्षेत्र के खरड़ गांव में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। प्रतिनिधिमंडल में सपा के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के शामिल होने से मौके पर काफी देर तक गहमागहमी बनी रही। पुलिस ने नेताओं को आगे जाने से रोकते हुए स्थिति को नियंत्रित किया। सपा नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई और इसे पीड़ित परिवार से मिलने से रोकने का प्रयास बताया।
सपा की ओर से खरड़ गांव में पीड़ित परिवार से मुलाकात का कार्यक्रम तय किया गया था। पार्टी नेताओं का कहना था कि प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचकर परिवार से घटना की जानकारी लेगा और उनकी समस्याओं को सुनेगा। इसी के तहत नेता और कार्यकर्ता गांव की ओर रवाना हुए थे। रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
बताया गया कि प्रतिनिधिमंडल में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री डॉ. राजपाल कश्यप, सांसद इकरा हसन, सांसद हरेंद्र मलिक समेत कई सपा नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद नेताओं ने मौके पर ही अधिकारियों से बातचीत की। कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जाहिर की।
पीड़ित परिवार से मिलने को लेकर पुलिस से हुई नोकझोंक
प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने के बाद मौके पर कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट गई। सपा नेताओं ने कहा कि वे किसी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार से मिलने और उसकी बात सुनने जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें गांव जाने से रोकना उचित नहीं है। पुलिस अधिकारियों ने मौके की स्थिति को देखते हुए नेताओं को आगे जाने से रोककर व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया।
सपा नेताओं ने कहा कि घटना की निष्पक्ष जानकारी लेना और पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रतिनिधिमंडल परिवार से मिलकर उनकी स्थिति जानेगा और मामले को पार्टी स्तर पर उठाया जाएगा।
खरड़ प्रकरण को लेकर सियासत तेज
खरड़ गांव का मामला सामने आने के बाद से ही क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। बुजुर्ग जयसिंह कश्यप की मौत के मामले को लेकर पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक दल भी सक्रिय हुए हैं। इसी क्रम में सपा ने प्रतिनिधिमंडल भेजकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करने का निर्णय लिया था।
प्रतिनिधिमंडल को गांव पहुंचने से पहले ही रोके जाने के बाद मामला और चर्चा में आ गया। सपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। नेताओं का कहना था कि पीड़ित परिवार की बात सीधे सुनने के लिए उनका गांव पहुंचना जरूरी था।
पुलिस की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने की बात सामने आई है। वहीं, सपा नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे प्रतिनिधिमंडल को रोकने के बजाय उसे मुलाकात की अनुमति दी जानी चाहिए थी।
मौके पर पुलिस और सपा नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत होती रही।
